बलिया। सदर तहसील में भ्रष्टाचार इस कदर है कि बिना क्षेत्रीय कानूनगो और लेखपाल की रिपोर्ट के और तहसील में ही चल रहे मुकदमे की बात को छिपाकर एक ही गांव के कई मौजे पर नामांतरण कर दिया गया है। हालांकि पीड़ित की ओर से शिकायत पर मामले की पड़ताल शुुरु हो गई है।
लाख कवायद के बावजूद जिले में भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। आलम यह है कि पूर्व की सरकारों की तर्ज पर ही आज भी तहसीलों में राजस्वकर्मी अपनी मनमानी कर रहे हैं। हैरानी की बात है कि एक ओर जहां मुख्यमंत्री की ओर से भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का दावा किया जा रहा है वहीं सदर तहसील के राजस्वकर्मी इस दावे को चुनौती दे रहे हैं। बताया जाता है कि सोहांव ब्लाक के भरौली गांव निवासी सिद्धनाथ राय का विवाद उनके पट्टीदार से है। उनके दो सगे भाईयों नारदमुनी व शंभूनाथ के निधन से बाद से नामांतरण को लेकर पट्टीदार से विवाद तहसीलदार कोर्ट में चल रहा है। सिद्धनाथ राय ने डीएम को शिकायती पत्र देकर बताया कि सभी तथ्यों को छिपाकर पट्टीदार ने 11 मौजे में गलत तरीके से नामांतरण करा लिया है। यह भी बताया है कि परगना गड़हा क्षेत्र राजस्व निरीक्षक सोहांव के तहत आते हैं जबकि नामांतरण राजस्व निरीक्षक फेफना के आदेश से किया गया है।
मामले की जब पड़ताल शुुरु हुई तो दो लेखपालों प्रीतेश कुमार यादव तथा पूनम कुमारी ने तहसीलदार को लिखित दिया है कि यह नामांतरण गलत है और यह खारिज करने योग्य है। सवाल उठता है कि जब राजस्व निरीक्षक सोहांव की तैनाती तहसील में है तो दूसरे क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक फेफना की रिपोर्ट पर नामांतरण क्यों किया गया? क्षेत्रीय लेखपालों से इस बाबत जांच क्यों नहीं कराई गई? तहसीलदार कोर्ट में ही विवाद होने के बावजूद तहसीलदार की नजर इस नामांतरण पर क्यों नहीं पड़ी? मामले को लेकर तहसील में चर्चाएं हो रही हैं।
××××××××××××××××
गलत तरीके से नामांतरण का मामला संज्ञान में है, दो लेखपालों ने इस बाबत लिखकर दे दिया है कि उनका हस्ताक्षर नहीं है। इस मामले में तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी गई है। जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
निखिल टीकाराम फुंडे, एसडीएम