बलिया। फर्जी नियुक्तियों को लेकर आईटीआई बलिया-रामपुर के प्रधानाचार्य नसीमुद्दीन को गोरखपुर की विजिलेंस तलाश कर रही है। राजकीय आटीआई कालेज अंबेडकर नगर में फर्जी तरीके से की गई पांचों नियुक्तियों में उनकी गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस टीम अधिकारी अजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में आईटीआई कालेज बलिया पहुंची। हालांकि टीम के आने की भनक लगते ही प्रधानाचार्य भाग गए। जिसके बाद टीम ने प्रधानाचार्य कक्ष के बाहर कुर्की का नोटिस चस्पा करा दिया। इसके बाद उनके मेज पर लगे शीशे पर भी एक नोटिस चस्पा कर दिया। प्रधानाचार्य के नहीं मिलने के कारण टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। उधर, टीम के पहुंचने के दौरान कॉलेज का एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वीडियो बना रहा था। जिसे विजिलेंस टीम ने देख लिया और उसके मोबाइल को जब्त कर साथ लेकर चली गई।
अंबेडरनगर जनपद में राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य पद पर तैनाती के दौरान नसीमुद्दीन ने पांच नियुक्तियां की थी। जिस पर जिले के ही एक व्यक्ति ने वैधता पर सवाल उठाते हुए विजिलेंस से जांच कराने की मांग शासन से की थी। इस मामले में प्रथम दृष्टया मामला सही पाते हुए शासन ने विजिलेंस को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दे दिया। जिसपर विजिलेंस की टीम ने वर्ष 2015 में आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए विवेचना शुरु कर दी। लेकिन संयोग ही रहा कि विवेचक जब भी जिले में पहुंचकर विवेचना करना चाहे प्रधानाचार्य उस दिन ड्यूटी से नदारद मिले। ऐसे में हर बार विवेचक को बैरंग लौटना पड़ा। विवेचना के क्रम में अब तक दो बार विजिलेंस के इंस्पेक्टर अजय प्रताप सिंह आ चुुके हैं। उन्होंने इस बार गिरफ्तारी वारंट के साथ ही धारा 82 सीआरपीसी की नोटिस भी लेकर आए थे। जिसे स्कूल में प्रधानाचार्य कक्ष नोटिस बोर्ड पर चस्पा करा दिया गया। वहीं उनके मेज में लगे शीशे में भी एक प्रति लगा दी गई। हालांकि इस बात की भी चर्चा रही कि विवेचक के हटते ही नोटिस को प्रधानाचार्य के नजदीकी माने जाने वाले एक चपरासी ने फाड़ दिया। हालांकि विवेचक का कहना है कि इसके बाद अगली कार्रवाई कुर्की की होगी।