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आरोपी हफ्तेभर बाद भी गिरफ्त से दूर

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सुखपुरा। थाना क्षेत्र के करमपुर गांव के समीप 22 अगस्त को खेत में सोए किसान की पीट-पीटकर की हत्या के मामले में सप्ताहभर बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। इसे लेकर लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे हैं।
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22 अगस्त को दिन में आरोपी की माता से लकड़ी उठाने को लेकर लालजी का विवाद हुआ था । वह जलावन की लकड़ी रखा था। जिसे आरोपी की माता बिना उससे पूछे ही अपने घर ले जा रही थी । टोका-टोकी के बाद महिला ने लकड़ी तो वहीं छोड़ दिया, लेकिन इस बात का जिक्र उसने घर जाकर अपने पुत्र से किया था। जिस पर महिला के पुत्र उमेश गोंड ने उसी दिन रात नौ बजे अपने साथियों के साथ लालजी के खेत पर पहुंचा था और लाठी से पीट-पीट कर उसे घायल कर फरार हो गया था। इलाज के दौरान लालजी की जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। मौत के पहले लाल जी ने पुलिस को घटना में लिप्त उमेश की जानकारी भी पुलिस को दे दी थी । 23 की सुबह लाल जी के पुत्र ने उमेश सहित तीन अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस घटना के दिन मौके पर गई। उसके बाद आज तक मामले को लेकर वह उदासीनता बरत रही।
बांसडीह, कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सभा मझोस खुर्द के पिंडहरा गांव में गुरुवार की रात बेरहमी से कोटेदार के नौकर हत्या कर दी गई। इस मामले में अभी तक पुलिस के किसी भी नतीजे पर न पहुंचने से उसकी कार्यशैली सवालों के घेरे में हैं। जबकि इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
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पीड़ित परिवारीजनों की मानें तो जिस कमरे में कोेटेदार सोया था, उसी कमरे के बाहर बरामदे में उनकी नौकर की इस तरह निर्ममता से गला रेतकर हत्या किया जाना गले से नहीं उतर रहा। वहीं कुछ लोगों का मानना ये भी है कि हो सकता है हत्यारो के निशाने पर कोटेदार था, चूंकि बाहर ही नौकर चादर ओढ़कर सोया था। लिहाजा हत्यारों ने गलती से नौकर को मौत की घाट उतार दिया। खैर चर्चाओं के बीच घटना खुलासा करने की जिम्मेदारी पुलिस की है। लेकिन आज पांच दिन भी पुलिस का हाथ इस मामले में खाली है। पीड़ित पत्नी मीरा देवी का कहना है कि पुलिस इस मामले में तत्परता नहीं दिखाते हुए उदासीनता बरत रही है।
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