बलिया। जिले के बहुचर्चित माइक्रो एलआईसी घोटाला मामले में पुलिस की शिथिलता को संज्ञान में लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसपी को नोटिस जारी कर मामले की निष्पक्ष जांच करने के संबंध में 15 दिन के भीतर शपथपत्र देने का आदेश दिया है।
घोटाला मामले में मुख्य आरोपी को बीते 14 नवंबर को ही गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन संस्थान के एमडी इंद्रावती सिंह और पंकज सिंह की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस अभी तक शिथिल पड़ी हुई है। इससे नाराज वादी अमर नाथ पांडेय ने बीते दिनों हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसपर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। ऐसे में वादी के साथ-साथ पालिसीधारकों में उम्मीद जगी है कि अब जल्द ही शेष बचे दो आरोपियों की गिरफ्तारी होगी और उन्हें उनकी मैच्युरिटी की धनराशि मिल सकेगी। नवंबर 2008 में पंजीकृत एनजीओ जीएसएसए ने मालगोदाम रोड पर कार्यालय खोला। यह संस्था बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण में पंजीकृत है और इसने सूक्ष्म बीमा कार्यालय मंडल गोरखपुर से जुड़कर कार्य शुरू किया। संस्था ने एजेंटों के माध्यम से एलआईसी की सूक्ष्म बीमा की पालिसी जीवन मधुर, जीवन दीप, जीवन मंगल के नाम से 100, 200, 500 की मासिक किस्त तथा फिक्स डिपाजिट पांच वर्ष के धन जमा करवाया। पहली किस्त को छोड़कर संस्था ने कोई किस्त गोरखपुर स्थित सूक्ष्म बीमा कार्यालय में जमा नहीं की। बीमा अवधि पूर्ण होने पर एमडी महावीर सिंह सिंह के हस्ताक्षर से सैकड़ों बीमाधारकों को बैंक आफ बड़ौदा के चेक दिए गए। सारे चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पहली बार एनजीओ के खिलाफ एजेंट अमर नाथ पांडेय ने आवाज उठाई और कोतवाली में 28 सितंबर को महावीर सिंह, इंद्रावती सिंह, पंकज सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। इसके बावजूद संबंधित पक्ष लेकिन गिरफ्तार नहीं हो रही थी।
अमर उजाला ने इस गबन के मामले को उजागार किया और 12 नवंबर 2018 के अंक में मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित किया था। इसके बाद पुलिस महकमा हरकत में आई और स्वाट टीम ने 14 नवंबर को फेफना थाना क्षेत्र के सिंहाचवर से महावीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। दो आरोपी इंद्रावती सिंह व पंकज सिंह आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और इनकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस कोई खास दिलचस्पी भी नहीं दिखा रही है। पुलिस की इसी शिथिलता से नाराज वादी अमरनाथ पांडेय ने बीते दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था।