बेल्थरारोड। तीन दिनों से लापता शहर के एक शापिंग माल संचालक को मंगलवार को रेलवे ट्रैक पर पाया गया। उसका हाथ और पैर बंधा हुआ था। पीड़ित व्यापारी का कहना है कि बदमाशों ने उसे अगवा कर प्रताड़ित किया और हाथ पैर बांध कर उसे रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। वहीं, पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही हैै।
तहसील के निकट केके माल के संचालक खालिद लारी तीन दिनों से लापता थे। मंगलवार सुबह पूर्वी केबिन के आगे रेलवे ट्रैक के निकट उन्हें पाया गया। उनके हाथ-पैर बंधे थे। खालिद का कहना है कि बदमाशों ने उन्हें अगवा कर प्रताड़ित करने के बाद रेलवे ट्रैक पर हाथ पैर बांध फेंक दिया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने चालक को बंधन से मुक्त कराया। खालिद जहीर का कहना है कि तीन दिन पूर्व माल से पैदल चौकिया मोड़ की ओर जा रहे थे कि स्विफ्ट डिजायर सवार चार लोगों ने हथियार के बल पर जबरन कार में बैठा लिया। उनके दोनों मोबाइल की बैटरी निकालने के साथ ही उनके पास मौजूद 80 हजार रुपये भी ले लिए। दो दिनों तक टॉर्चर करने के बाद अपहर्ता सोमवार की रात उनका हाथ पैर बांध तुर्तीपार पहुंचे तथा बाइक से कुंडैल ढाला के निकट रेलवे ट्रैक के पास फेंक भाग निकले। उन्होंने पैसे की उगाही के संबंध में कुछ भी कहने को मना कर दिया। थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला कि किसी का उधार पैसा नहीं देने के लिए संचालक ने सुनियोजित साजिश के तहत अपने अपहरण की कहानी गढ़ रहा है।
इस घटना को लेकर पुलिस पर लीपापोती के आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच के पूर्व ही इसे संदिग्ध करा दे रही है। उधर, शापिंग माल के संचालक खालिद लारी का भी आरोप है कि पुलिस इस मामले को लीपापोती करना चाहती है। आरोप लगाया कि उनके कहने के बावजूद पुलिस ने उनका मेडिकल तक नहीं कराया। यह घटना सही होने के बावजूद उसे संदिग्ध बनाया जा रहा है। पीड़ित से यह पूछने पर कि यदि बदमाशों का इरादा लूट का था तो उन्होंने आपको अगवा कर क्यों रखा, वह कुछ भी बताने से इंकार कर देते हैं।
बलिया में डाक्टर से मांगी गई थी दो करोड़ की रंगदारी : व्यापारी को उठाने और उसे लूटने का यह पहला मामला नहीं हैं। अभी डेढ़ महीने पूर्व ही एक डाक्टर के यहां बदमाशों ने उनके नर्सिंग होम में एक लेटर भेजा था जिसमें कहा गया था कि दो करोड़ ना देने पर परिणाम भुगतना पड़ेगा। इसे लेकर चिकित्सकों का एक दल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले कोतवाल, एसपर डीएम समेत आला अधिकारियों से मिला था और कार्रवाई की गुहार लगई थी। पिछले कुछ महीनों में बलिया में फिरौती मांगने का दौर सा शुरू हो गया है। कई मामलों को पुलिस ने संदिग्ध मानकर दबा दिया। लेकिन जानकारों की माने तो बिहार की सीमा से सटे होने के चलते यहां के व्यापारी और बड़े नर्सिंग होम संचालकों पर अपहरण करने वाले गिराहों और माफियाओं की नजर है। इसके चलते इन लोगों को अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं। कई मामलों में डर के चलते यह लोग पुलिस के पास अपनी शिकायत तक दर्ज नहीं कराते।