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आला अफसरों का निर्देश भी डीपीआरओ के ठंडे बस्ते में

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बलिया। जनपद का डीपीआरओ कार्यालय लापरवाह और भ्रष्ट सचिवों को बचाने का आश्रय बन चुका है। कार्यालय के लिए आला अफसरों का निर्देश भी शायद कोई खास मायने नहीं रखता है। आलम यह है कि सीडीओ का आदेश जहां एक सप्ताह से ठंडे बस्ते में है वहीं मुकदमा दर्ज होने के बावजूद संबंधित सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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कुछ दिनों पहले नगरा ब्लाक के पालचंद्रहा गांव के हरिन्द्र पांडेय, विनोद यादव आदि ने डीएम को शिकायती पत्र देकर गांव में आवास योजना की जांच की मांग की। डीएम ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने का निर्देश सीडीओ को दिया। सीडीओ ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी को दी।
डीडीओ ने जांच में पाया कि गांव की श्रीमती रजिया देवी को वर्ष 2009-10 में इंदिरा आवास आवंटित किया गया लेकिन इस धन का दुरुपयोग लाभार्थी द्वारा दूसरे मद में किया गया। इतना ही नहीं इसे वर्ष 2016-17 में फिर लोहिया आवास का आवंटन कर दिया गया। इसके अलावा गांव के ही श्रीमती बाना को दो बार लाभ पहुंचाते हुए वर्ष 2009-10 में इंदिरा आवास तथा वर्ष 2016-17 में लोहिया आवास का आवंटन किया गया।डीडीओ ने इसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारी शशिकांत सिंह को दोषी मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की। डीडीओ की रिपोर्ट पर सीडीओ ने एक सप्ताह पहले डीपीआरओ को ग्राम पंचायत अधिकारी शशिकांत सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया। लेकिन एक सप्ताह बाद भी डीपीआरओ की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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इसी तरह रेवती ब्लाक के हड़िहाकला के सचिव दिनेश सिंह, प्रधान, पूर्व प्रधान समेत चार लोगों के खिलाफ सीजेएम के आदेश पर रेवती पुलिस ने आईपीसी की धारा 406, 409, 419, 420, 466, 467, 468 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। गांव के सुदामा वर्मा ने कई बार गांव में आवास योजनाओं में धांधली तथा विकास कार्यों में गोलमाल की शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर सीजेएम से गुहार लगाई थी। मुकदमा दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी डीपीआरओ की ओर से संबंधित सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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