बलिया (भीमपुरा)। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान किड़िहरापुर रेलवे स्टेशन पर दलित संगठनों द्वारा किए गए प्रदर्शन के मामले में रेलवे पुलिस ने गुरुवार को कई गांवों में दबिश दी और सम्मन का तामिल कराया। इसको लेकर क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
एससी-एसटी एक्ट के बाबत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में दो अप्रैल को वाराणसी-भटनी रेल खंड के किड़िहरापुर रेलवे स्टेशन पर दलित संगठनों द्वारा प्रदर्शन किया गया था। इसके चलते तीन घंटे तक ट्रेनों का संचालन बाधित रहा। इस प्रदर्शन के चलते नगरा-मझवारा मार्ग भी अवरुद्ध रहा। प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन से लेकर रेलवे फाटक तक बारी-बारी से जाम लगाया था तथा दक्षिणी आउटर सिग्नल पर खड़ी बापू धाम एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी भी की गई थी। प्रदर्शनकारियों को शांत कराने व जाम को समाप्त कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस मामले में मऊ आरपीएफ ने 10 नामजद व 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। गुरुवार को मऊ आरपीएफ भीमपुरा थाने पहुंची तथा स्थानीय पुलिस के सहयोग से कई गांवों में दबिश दी। हालांकि आरोपी तो नहीं मिले लेकिन उनके परिजनों को आरपीएफ ने सम्मन तामिल कराया। बताया जाता है कि आरपीएफ आरोपियों की पहचान करने के लिए प्रदर्शन के दौरान की गई वीडियोग्राफी का सहारा ले रही है। इसके लिए भी वह ग्राम प्रधान को बुलाने का काम कर रही है ताकि पहचान सही हो सके। इंदारा आरपीएफ चौकी प्रभारी सुधीर कुमार राय ने बताया कि हर गांव से ग्राम प्रधान सहित पांच लोगों को बुलाया गया है। ताकि प्रदर्शन के दौरान की गई वीडियोग्राफी से अज्ञात लोगों की शिनाख्त हो सके।