बलिया। जिले के अलग-अलग हिस्सों में बीते चार दिनों भीतर महिलाओं और युवतियों की चोटी कटने की करीब दस घटनाएं हो चुकी हैं। आलम यह है कि जितनी भी घटनाएं घटित हो रही हैं उनमें से अधिकांश गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार की 20 वर्ष के भीतर की महिलाओं के साथ घटित हो रही है। कुछ छोटी बच्चियों के साथ भी घटनाएं हुई है। खास बात यह भी है कि चोटी कटने की घटना के बाद पीड़िता पूरी तरह से भयजदा हो जा रही है तथा उसे अस्पताल तक में भर्ती कराने की नौबत आयी है।
अब तक चोटी कटने की घटनाएं अब तक जिन क्षेत्र में सामने आई उसमें दुबहर, लालगंज, रेवती, चिलकहर, रतसर, बेल्थरारोड शामिल है। दुबहर क्षेत्र में उदयपुरा और जमुआ में दो अलग-अलग स्थानों पर चोटी कटने की बात प्रकाश में आई है। इसको लेकर लोगों में तहर-तरह की चर्चा तो है ही लोगों में सामाजिक विद्वेष को भी प्रमुख कारण माना है। लोगोें की माने तो अक्सर चोटी कटने की शिकायत उन्हीं गरीब परिवारों में मिल रही है। जिसकी आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं हो। एक भी ऐसा मामला पढ़े-लिखे और आर्थिक रुप से मजबूत लोगों के साथ नहीं घटित हुआ। पुलिस भी इस घटना को अंधविश्वास से जोड़कर देख रही है। समाजशास्त्री रामशरण पांडेय बताते हैं कि कभी-कभी हम जिस बात को सोचते हैं वहीं हमारे में मन में बैठ जाता है। कम पढ़े-लिखे लोगों में यह बातें अधिक देखने को मिलती है। चोटी काटने वाली बात पूरी तरह से मनगढंत है। इसमें कुछ लोग साजिश का शिकार भी हो रहे है।
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जिले में कई इलाकों में चोटी कटने की शिकायत मिल रही है। अधिकांश मामले अंधविश्वास से जुड़े हुए है। इस तरह कोई अपराधी नहीं होगा जो हरियाणा से लेकर यूपी के गांवों में चोटी काटता रहे। चोटी कटने वाले प्रकरण के पीछे किसी प्रकार के कीड़े की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
मो. नसीम
सीओ सदर, बलिया