बलिया। डीआईओएस कार्यालय में निलंबित बाबू ही करीब एक माह से डिस्पैच का काम कर रहा था। शुक्रवार को जेडी के आने की जानकारी पर गायब हो गया और डिस्पैच रजिस्टर नहीं मिला। इस मामले में डीआईओएस ने डिस्पैच का प्रभार दूसरे बाबू को दे दिया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बाबुओं की मनमानी जगजाहिर है। ऐसा ही नजारा दो दिन पहले तब सामने आया जब जिले में बोर्ड परीक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ अनारपति वर्मा जिले में पहुंची। जब जेडी डीआईओएस कार्यालय पहुंची तो डिस्पैच बाबू एसके चौबे गायब थे। जब जेडी ने डिस्पैच रजिस्टर मांगा तो नहीं मिला। जानकारी पर सामने आया कि चौबे को करीब एक माह पहले ही लापरवाही में निलंबित किया जा चुका है। जेडी ने इस संबंध में प्रभारी डीआईओएस से जबाव-तलब भी किया। शनिवार को जब डीआईओएस कार्यालय पर पहुंचे तो निलंबित बाबू के डिस्पैच कार्य से हटाने की प्रक्रिया शुरु की गई। सूत्रों की मानें तो निलंबित बाबू डिस्पैच रजिस्टर को भी अपने कब्जे में रखे हुए था। हालांकि अधिकारियों के सख्त रवैये के बाद निलंबित बाबू ने डिस्पैच रजिस्टर को डीआईओएस के हवाले कर दिया। इसके बाद डीआईओएस ने कार्यालय के ही संजय यादव को डिस्पैच पटल का कार्यभार देते हुए रजिस्टर भी उनके जिम्मे दे दिया।
करीब एक माह पहले हाईकोर्ट की ओर से डीआईओएस के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया। इसकी जानकारी होते ही विभाग में हड़कम्प मच गया और आनन-फानन में इससे बचने की तैयारी में डीआईओएस जुट गए। इस मामले की जब छानबीन शुरु हुई तो पता चला कि हाईकोर्ट की ओर से निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होने के कारण ऐसा हुआ है जबकि नोटिस कार्यालय को भेजी गई है। इसमें डिस्पैच पटल प्रभारी की लापरवाही सामने आई कि उन्होंने डीआईओएस को समय से मामले से अवगत नहीं कराया। इसके चलते जेडी ने डिस्पैच पटल प्रभारी को जेडी ने निलंबित कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी वह काम करते रहे।