बैरिया। तहसील क्षेत्र को इस समय दारु व लाल बालू ने अपने आगोश में ले लिया है। अंधेरा कायम होते ही यह दोनों धंधा शबाब पर आ जाता है। कुछ सरकारी कर्मचारियों के पिटाई की घटना के बाद से प्रशासनिक अमला भी माफियाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगा है। जिससे बालू और शराब के अवैध धंधा का यह क्षेत्र हब बनता जा रहा है। बिहार से लाल बालू तो उप्र से शराब की तस्करी होती है।
शराबव लाल बालू के अनूठे सगंम में पुलिस रोज ही डुबकी लगा रही हैं। आम तो आम इन धंधों में माननीयों के रिश्तेदार , नातेदार जोरों पर लगे हैं। दोकटी और बैरिया की कमाई लगभग तीन लाख रुपये रोज है। पैसा देने वालाें की शराब बिहार पार आसानी से हो जाती है तो लाल बालू भी दोकटी व बैरिया से उप्र के अन्य शहरों में जाता है। पैसा नहीं देने पर शराब व बालू जब्त करते हुए कार्यवाही होती है। यह खेल किसी से छुपा नहीं है। जनप्रतिनिधि से लेकर उपर के अधिकारी इस खेल को बखूबी जानते हैं। लेकिन इस खेल को रोकने से ज्यादा मजा खेल को जारी रखने में आ रहा है। अधिकांश अराजकतत्व इस धंधे में लगे हैं। इस धंधे को पुलिस की 100 नंबर गाड़ी से बढ़ावा मिल रहा है। 100 नंबर की गाड़ी आज कल अपराध कंट्रोल से ज्यादा रातभर भ्रमण कर सिर्फ वसूली कर रही है। धंधेबाज व पुलिस की युगलबंदी से यह धंधा अमीर बनने का जरिया बनता जा रहा है। दोनों धंधों की मॉनीटरिंग सफेदपोश कर रहे हैं।