बलिया। जिले के रोजगार सेवक आज भी बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे हैं, जबकि वर्ष 2009 में नियुक्ति के समय ही शासनादेश था कि प्रत्येक जनपद के प्रत्येक रोजगार सेवकों को दो दिवसीय ट्रेनिंग देने के साथ-साथ किट भी मुहैया कराया जाय और इसके लिए शासन ने पर हेड एक हजार रुपये खर्चा भी रखा था। लेकिन जनपद के 833 रोजगार सेवकों को आज तक ट्रेनिंग नहीं दी गई। चर्चा है कि ट्रेनिंग के लिए शासन से निर्गत आठ लाख 33 हजार रुपये डीआरडीए विभाग के अधिकारी गटक गए।, हालांकि विभागीय अधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं। पड़ोस के जनपद गाजीपुर के रोजगार सेवकों को ये ट्रेनिंग 2009 में ही नियुक्ति के ठीक एक सप्ताह बाद मिल चुकी है।
नरेगा योजनांतर्गत ग्राम समाज में कराए जा रहे कार्यों की देखरेख के लिए वर्ष 2009 में रोजगार सेवकों का पद सृजित किया गया। इसके बाद प्रत्येक जनपद में रोजगार सेवकों की नियुक्ति की गई। जनपद बलिया में भी कुल 833 रोजगार सेवकों की नियुक्ति हुई। उस दौरान शासनादेश जारी हुआ कि समस्त रोजगार सेवकों को दो दिवसीय ट्रेनिंग दी जाय। इसके लिए शासन ने प्रति रोजगार सेवक 1000 रुपये का खर्च भी रखा। लेकिन जनपद के रोजगार सेवकों को आज तक ट्रेनिंग नहीं दी गई, जबकि पड़ोस के जनपद सहित अन्य जनपदों में भी तैनात रोजगार सेवकों को वर्ष 2009 में नियुक्ति के एक सप्ताह के अंतराल में दो दिवसीय ट्रेनिंग दी गई। मामला संज्ञान में आते ही डीआरडीए विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं विभाग के मुखिया पीडी रामकुमार त्रिपाठी ने इससे अनभिज्ञता जताते हुए डीसी मनरेगा से बात करने को कहा।
कोट
रोजगार सेवकों को ट्रेनिंग नहीं दी गई। इसी महीने में ट्रेनिंग दी जाएगी। ताकि रोजगार सेवक अपना काम सुचारू रूप से कर सकें।
उपेंद्र कुमार पाठक, डीसी मनरेगा
कोट
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, यदि 2009 से आज तक रोजगार सेवकों को ट्रेनिंग नहीं दी गई है, तब नियम विरूद्ध है। यदि अब विभाग ट्रेनिंग देने की बात कह रहा है तो ये भी स्वीकार्य नहीं है। जांच करा कर कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी