बलिया। गुलाब और इत्र की नगरी! जो कभी गंगा जमुनी तहजीब के नाम से जानी जाती थी। लेकिन दशहरा की शाम को फूटी चिंगारी के चलते रविवार को दो समुदायों के बीच जमकर जंग हुई। जिसमें कई घर, दूकानों में तोड़फोड़ व लूटपाट हुई। कई लोग गंभीर रुप से जख्मी होकर वाराणसी सहित आपपास के अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं।
कल तक साथ-साथ उठने-बैठने तथा एक दूसरे के दु:ख दर्द काम आने वाले लोग कुछ ही घंटे की नफरत में एक दूसरे के खून के प्यासे नजर आने लगे। सिकंदरपुर में दशहरा के दिन छेड़खानी से उपजे विवाद ने इस कदर अपना पांव फैला लिया कि अब जहां भी देखिए एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय के लोगों को नफरत की भावना से देखने लगे है। इसी बीच कुछ सामाजिक संगठनों ने शांति बहाल करने की कोशिश भी की है। तजिया के लिए एक समुदाय के लोगों द्वारा पहले पत्थरबाजी कर आगजनी के बाद तो पूरा सिकंदरपुर कसबा ही आग में सुलगने लगा है। अब कसबे के लोग सिर्फ एक ही बात कर रहे है कि कुछ घंटे की नफरत ही समाप्त करा दी गई होती तो जिंदगी भर के लिए दर्द देने वाली घटनाएं ही नहीं होती। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से जिम्मेदार है।