बलिया। रेलवे क्रासिंग पर तैनात गेेटमैन शैलेश तिवारी की हत्या हुए ढाई साल बीत गए। लेकिन पुलिस अब तक हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। हालांकि अब तक तीन जीआरपी थानाध्यक्षों का तबादला किया जा चुका है। फिर भी हत्याकांड की गुत्थी नहीं सुलझ सकी। छह फरवरी 2018 की रात रेलवे स्टेशन के पश्चिमी केबिन पर तैनात गेटमैन शैलेश तिवारी की अज्ञात हमलावरों ने लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी थी। स्टेशन मास्टर राजीव राय की तहरीर पर जीआरपी ने अज्ञात हमलावरों के विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज किया था। हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी के लिए जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम गठित हुई थी। लेकिन बाद में हत्याकांड के खुलासे का जिम्मा जीआरपी ने उठाया। खुलासा में देरी को देखते हुए जीआरपी अधीक्षक ने तत्कालीन थाना प्रभारी यूके श्रीवास्तव का तबादला कर नए थानाध्यक्ष के रूप में राजा भैया को तैनात किया। लेकिन घटना के छह माह बीतने के बाद भी राजा भैया खुलासा करने में असमर्थ रहे। उनके बाद बस्ती जीआरपी में तैनात थाना प्रभारी रामकृष्ण मिश्र को जीआरपी की कमान सौंपी गई। अब अरविंद पांडेय को जीआरपी प्रभारी हैं। जिन्हें हत्याकांड का खुलासा करना है। अरविंद पांडेय को आए सालभर हो गए। लेकिन उन्हें भी अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। जीआरपी प्रभारी अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि मामले की छानबीन चल रही है। फिलहाल अभी कोई आरोपी गिरफ्त में नहीं आ सका है।