बलिया। शासन के निर्देश पर दो माह बाद एक बार फिर एक पखवाड़ा तक वरासत अभियान शुरू किया गया लेकिन किसी भी गांव में राजस्वकर्मी नहीं पहुंचे और न ही कोई वरासत का कार्य हो सका। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार गांववार रोस्टर भी बनाया गया है। अभियान में गैर विवादित वरासत के लिए आवेदन लिए जाने का प्रावधान है। बताया जाता है कि मंगलवार को तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित होने के कारण राजस्वकर्मी वहीं रहे। शासन के निर्देश पर जिले में 21 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अभियान चलाया गया लेकिन एक पखवाड़ा तक चले अभियान में अधिकांश गांवों में कोई भी राजस्वकर्मी नहीं पहुंचा और न ही कोई वरासत का कार्य ही हो सका। अब शासन ने एक बार फिर 15 से 30 दिसंबर तक अविवादित वरासत के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया है। किसी भी गांव में कोई राजस्वकर्मी नहीं पहुंचा और न ही किसानों से कोई आवेदन ही लिया गया। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लॉक के भरौली, गोविंदपुर, सोहांव, लक्ष्मणपुर, चौरा, अमांव, बघौना, टुटुवारी, उजियार, नारायनपुर, टुटुवारी, मेड़वरा कला, मेड़वरा खुर्द आदि गांवों में किसान राजस्वकर्मियों के आने का इंतजार करते रह गए। यही हाल जनपद के अन्य तहसीलों के गांवों में भी रहा। बांसडीहरोड में अभी तक वरासत अभियान के तहत क्षेत्र में कोई भी राजस्वकर्मी नहीं दिखा। वरासत को लेकर कई माह से लोग लेखपालों की परिक्रमा कर रहे हैं। बैरिया तहसील में रोस्टर आज बन रहा है, इसके बाद ही गांवों में लेखपाल पहुंचेंगे। भीमपुरा में वरासत अभियान खोखला साबित हो रहा है। क्षेत्र के हर गांवों में दर्जनों लोगों के वरासत संबंधी मामले लंबित हैं। यहां तक कि दशकों से वरासत कराने के लिए लोग राजस्व विभाग की परिक्रमा कर रहे हैं। आज भी राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में नहीं दिखे और मोबाइल पर लोगों को वरासत कराने का पाठ पढ़ा रहे हैं। ऐसे में यह अभियान क्षेत्र के लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।