धीरे-धीरे यह मामला न्यायिक पेचीदगियों में उलझता चला गया और विभागीय उदासीनता ने इसे और जटिल बना दिया। कोर्ट द्वारा बैंक खाता को कुर्क कर शिक्षकों का भुगतान का आदेश दिया। बीएसए ने शपथपत्र देकर कहा कि एमडीएम, रसोईया, शिक्षा मित्र को प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो इनके जीविका का साधन है।
इसके अलावा शिक्षक, शिक्षेणत्तेर कर्मचारियों के वेतन भुगतान के साथ अन्य खर्च का भुगतान होता है जो प्रभावित हो रहा है। 28 अक्टूबर को कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर जनहित में 12,39,342 रुपया की राशि छोड़कर बाकी का भुगतान की अनुमति कोर्ट ने दी। तीन नवंबर को अदालत में अगली सुनवाई में वादी के अधिवक्ता ने आवेदन देकर बताया कि शिक्षक का भुगतान बीएसए की ओर से नहीं किया गया।
अतिरिक्त सिविल जज संजय कुमार गोड़ ने निर्देश दिया है कि अमीन सुधीर सिंह आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें एवं नियत तिथि तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलिया कार्यालय को कुर्क करके अपनी आख्या न्यायालय न्यायालय में प्रत्येक दशा में प्रस्तुत करना कराने का सख्त निर्देश दिया।