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Ballia News: टीईटी पास न करने वाले जिले के 3800 शिक्षकों की बढ़ी चिंता

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बलिया। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय ने जिले के हजारों परिषदीय शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। न्यायालय के आदेश के अनुसार अब टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा तक परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों के सामने सेवा संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में लगभग 3800 ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। इन शिक्षकों को जुलाई 2028 तक टीईटी पास करने का अवसर दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा तक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की गई तो उनके भविष्य को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

2011 में शुरू हुई थी टीईटी व्यवस्था

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम-2009 के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू की गई थी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुसार वर्ष 2011 में पहली बार टीईटी परीक्षा आयोजित की गई। इससे पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद अब आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक माना गया है। पहले टीईटी पास करने की समय सीमा जुलाई 2027 तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर जुलाई 2028 कर दिया गया है।
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शिक्षकों में बढ़ी असमंजस की स्थिति

परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय उन्हें टीईटी पास करने की कोई अनिवार्यता नहीं बताई गई थी। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अब यह शर्त लागू किए जाने से असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब भी टीईटी का विज्ञापन जारी होता है, शिक्षक परीक्षा में शामिल होकर पात्रता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। बावजूद इसके अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं।

नियुक्ति के समय नहीं दी गई स्पष्ट जानकारी : चौबे

विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौबे ने कहा कि यदि वर्ष 2017 के संशोधन को आधार बनाया जा रहा है तो यह गंभीर विषय है। उनका कहना है कि संशोधन के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी आदेशों में पुराने शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), जो शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था है, ने भी कहीं स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य होगा।

शिक्षकों के साथ खड़ा रहेगा संगठन : धीरज राय

विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के मंत्री धीरज राय ने कहा कि यदि केवल टीईटी को ही शिक्षण गुणवत्ता का पैमाना माना जाए तो फिर शिक्षकों के प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, नवाचार कार्यक्रमों, डिजिटल शिक्षण और शैक्षिक सुधारों पर हर वर्ष खर्च किए जाने वाले लाखों रुपये का औचित्य क्या है। उन्होंने कहा कि संगठन शुरू से ही इस व्यवस्था का विरोध करता रहा है और भविष्य में भी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। क्योंकि यह हजारों शिक्षकों के भविष्य और रोजगार से जुड़ा मामला है।
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