स्वच्छ भारत मिशन के तहत जहां सभी गांवों में साढ़े तीन वर्ष बाद भी सामुदायिक शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है वहीं जहां बने हैं उसका लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। रखरखाव व साफ- सफाई पर हर महीने लाखों की धनराशि खर्च की जा रही है, लेकिन अधिकांश इलाकों में इसे बंद करके रखा जाता है। इतना ही नहीं करीब 25 फीसदी सामुदायिक शौचालयों का संचालन ही नहीं है।
करीब साढ़े तीन वर्ष पहले स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय निर्माण को स्थगित कर दिया और गांवों में सामुदायिक शौचालय के निर्माण का निर्देश दिया। वर्तमान में कुल 848 सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य है। जमीन के अभाव में अभी 70 गांवों में इसका निर्माण शुरु नहीं है।
सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के बाद इसके संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देने का प्रावधान किया गया। इसके लिए संबंधित महिला स्वयं सहायता समूह को प्रतिमाह छह हजार रुपये बतौर मानदेय व शौचालय की साफ-सफाई, मरम्मत, यूटीलिटी चार्जेज, डिटर्जेंट व ब्रश आदि सफाई सामग्री की खरीदारी के लिए तीन हजार प्रतिमाह देने की व्यवस्था की गई। इन सबों के बावजूद गांवों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण व संचालन केवल कोरम बना हुआ है।
संचालन पर औसत हर माह खर्च हो रहा 54 लाख
पंचायती राज विभाग के आंकड़ों में कुल 835 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हो चुका है। लेकिन औसत 600 सामुदायिक शौचालयों के सापेक्ष ही भुगतान होता है। इसके अनुसार ही देखें तो सामुदायिक शौचालयों के संचालन पर कुल 54 लाख की धनराशि खर्च हो रही है।
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सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में भी खूब खेल
सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में खूब धांधली की गई है। पिछले माह हनुमानगंज ब्लॉक के भीखपुर गांव की प्रधान की शिकायत पर जांच में सामने आया कि तत्कालीन सचिव द्वारा मार्च 2021 में ग्राम निधि के खाते से सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए 3.53 लाख व मनरेगा खाते से पंचायत भवन निर्माण के लिए 7.95890 लाख की धनराशि का आहरण किया गया है। लेकिन न तो पंचायत भवन का निर्माण हुआ है और न ही सामुदायिक शौचालय का निर्माण ही हो सका है। सीडीओ के निर्देश पर डीडीओ ने भीखपुर ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव व ग्राम विकास अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पाठक को निलंबित कर दिया।
शौचालयों में लटके ताले, ग्रामीण सड़क पर जाने को मजबूर
कोठियां का सामुदायिक शौचालय जब से बना है तब से खुला ही नहीं। यही स्थिति पड़री की भी है। सिसवार के सामुदायिक शौचालय में हमेशा ताला लटका रहता है। नगरा ब्लाक मुख्यालय पर निर्मित शौचालय में भी ताला बंद रहता है। भीमपुरा नंबर दो का सामुदायिक शौचालय हमेशा बंद रहता है। यही स्थिति परसियां व इंदासों के शौचालयों की है। ककरी के सामुदायिक शौचालय में भी ताला लटका है। रेकुआंनसीरपुर के शौचालय की भी हालत खराब है। संवाद