बलिया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने के बाद सूती कपड़े, धागे और फैब्रिक पर टैक्स लगने का असर उसकी कीमतों पर भी पड़ेंगी। अभी तक रेडिमेड को छोड़कर किसी प्रकार के कपड़ों पर टैक्स नहीं था, लेकिन जीएसटी में सभी तरह के कपड़ों को टैक्स के दायरे में रखा गया है। कपड़ों पर टैक्स लगने से उसकी कीमतें भी बढ़नी लगभग तय है। इसका असर आम आदमी पर भी पड़ना लाजिमी है।
जीएसटी में सूती कपड़े, धागे और फैब्रिक के लिए पांच परसेंट की दर तय की गई है। अभी तक इन पर शून्य शुल्क लगता था। सभी तरह के फैब्रिक पर 5 परसेंट का टैक्स लगेगा। 1,000 रुपये से अधिक मैनमेड कपड़ों पर पांच परसेंट टैक्स लगेगा। इससे अधिक की कीमत के कपड़ों पर 12 परसेंट टैक्स लगेगा।
कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि सरकार सूती कपड़े, धोग और फैब्रिक को टैक्स के दायरे में लाकर महंगाई बढ़ाने का कार्य कर रही है। आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। ऐसे कपड़ों तक आम आदमी की पहुंच आसानी से थी, लेकिन टैक्स लगने से इसका असर कीमतों पर अवश्य पड़ेगा।
चैम्बर्स आफ कामर्स के जिलाध्यक्ष डॉ ओमकार लाल का कहना है कि जीएसटी को लेकर अभी जागरूकता की जरूरत है। सरकार को चाहिए कि जिससे आम आदमी अथवा अत्यंग गरीब प्रभावित हो रहा है, उसे टैक्स के दायरे से बाहर रखना चाहिए। सूती कपड़ा, धागे को टैक्स के दायरे में लाने से निश्चित की आम आदमी प्रभावित होगा।
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक गुप्ता का कहना है कि आजादी से अब तक कपड़े या यार्न पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं लग रहा था लेकिन, अब यार्न की खरीदारी से लेकर टैस्ट करने और उसे तैयार करने तक कई तरह के टैक्स देने होंगे, जिसका प्रभाव कारोबार पर पड़ेगा।
कोलकाता, गुजरात से आते हैं सूती कपड़े
बलिया। जनपद में सूती कपड़े, फैब्रिक कोलकाता, वाराणसी, मुंबई व गुजरात से आता है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि उक्त कपड़ों को टैक्स के दायरे में लाए जाने का असर उनपर भी पड़ेगा। सामान तो उतना ही रहेगा, लेकिन टैक्स लग जाने से कीमतें भी बढ़नी तय है।
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कपड़े पर टैक्स लगने से रुकेगी चोरी
बलिया। सूती कपड़ों पर टैक्स लगने से अब उसकी चोरी पर भी अंकुश लगेगा। पहले जहां सिर्फ रेडिमेड कपड़ों पर ही सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों की नजर रहती थी, लेकिन अब सूती कपड़ों, फैब्रिक भी जीएसटी के दायरे में आने से चोरी-छिपे व्यापार कर पाना संभव नहीं होगा।
कपड़ा व्यापारियों ने पत्रक सौंप जताई थी नाराजगी
बलिया। सूती कपड़ों, फैब्रिक को जीएसटी के दायरे में रखकर पांच प्रतिशत टैक्स लगाए जाने की जानकारी होने पर नगर के प्रमुख व्यापारियों ने प्रदर्शन कर नाराजगी भी जताई थी। ईंद जैस प्रमुख पर्व से दो दिन पूर्व दूकानें बंद कर विरोध भी जताया था। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से वित्त मंत्री को पत्रक भेजा है।