जिले में विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने में लापरवाही सामने आ रही है, जिसमें चतुर्थ और तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को पीठासीन अधिकारी बनाकर पत्र भी जारी कर दिया जा रहा है। ड्यूटी लगाने में खामियां मिलने के बाद एनआईसी के अधिकारी इसे संबंधित विभागों की त्रुटि करार दे रहे हैं, जबकि ड्यूटी फीडिंग का कार्य एनआईसी के जिम्मे ही होता है। इस बात को लेकर खलबली बच गई है।
एनआईसी अधिकारियों की माने तो जनपद में चुनाव ड्यूटी के लिए विभिन्न विभागों की तरफ से करीब 25 हजार कर्मचारियों की सूची एनआईसी को फीडिंग करके उपलब्ध कराई गई है। इसके तहत जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में बनाए गए 2409 मतदेय स्थलों समेत अन्य जगहों पर चुनाव ड्यूटी के लिए करीब साढ़े दस हजार कर्मचारियों की जरूरत होगी।
चुनाव के लिए कर्मचारियों की आनन-फानन में ड्यूटी लगाकर उन्हें पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन ड्यूटी लगाने में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है, चतुर्थ और तृतीय श्रेणी कर्मचारी को भी पीठासीन अधिकारी बना दिया गया है। पीठासीन अधिकारी के लिए चुनावी ड्यूटी का पत्र देख कर्मचारियों के होश उड़ गए हैं। ऐसे कर्मचारियों का कहना है कि एनआईसी के अधिकारी चुनावी ड्यूटी लगाने में जमकर मनमानी करते हैं। कर्मचारियों की रैंक का पता लगाए बिना ही उन्हें जिम्मेवार पद पर ड्यूटी लगा देते हैं। इस संबंध में एनआईसी के अधिकारी मोहम्मद सउद का कहना है कि विभिन्न विभागों से जो फीडिंग करके सूची मिली है, उसी आधार पर चुनावी ड्यूटी लगाई गई है। यदि कोई त्रुटि होगी तो दुरुस्त कर दिया जाएगा।