चौबे छपरा में महज दो गज की झोपड़ी में जीने को मजबूर रघुनाथ जिनका घर दो दिन पहले गंगा की कटान में समा गया है।
ग्राम सभा गंगापुर का पूरवा चौबे छपरा, जिसकी आबादी करीब पांच सौ है, अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। गंगा के कटान में पिछले तीन दिनों के अंदर तीन घर विलीन हो चुके हैं। कटान पीड़ित रतजगा कर अपने सामान सुरक्षित ले जाने में जुटे है। गांव के करीब 150 घर कटान के मुहाने पर हैं। इन लोगों के सामने सिर छुपाने की छत से लेकर पेट की आग बुझाने तक की समस्या है।
अपने सामानों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना भी कोई आसान नहीं क्योंकि कोई संपर्क मार्ग दुरुस्त नहीं है। बरसों पहले तिनका-तिनका जोड़कर अपने सपनों का महल तो खड़ा कर दिया। लेकिन जब गंगा नदी की तेज लहरें चौबे छपरा के घरों को निगलना शुरू कर दिया तो पीड़ित अपना सामान सुरक्षित स्थान पर रखने को विवश हो गए। कटान पीड़ित चौबे छपरा निवासी हृदया नन्द मिश्र, सुशील मिश्रा, जनार्दन खरवार, अमरनाथ मिश्र, अभिराज आदि का कहना है कि शासन-प्रशासन समय रहते कोशिश की होती तो हमारा आशियाना बचाया जा सकता था। लेकिन कोशिश तो दूर की बात हमें कोई पूछने तक नहीं आया।
मालूम हो कि चौबे छपरा निवासी रामकिशोर मिश्र, रामकेशरी देवी और राजनारायण मिश्र का घर दो दिन पूर्व गंगा की कटान की भेट चढ़ चुका है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हैं। प्रशासन की तरफ अभी तक उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है।