नगरा। क्षेत्र के नरही में चल रहे पंद्रह दिवसीय श्री लक्ष्मी नृसिंह ज्ञान महायज्ञ के दौरान वृंदावन से आए रासलीला कलाकारों ने बृहस्पतिवार की रात बकासुर और अघासुर वध का सजीव मंचन किया। लीला मंचन देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी के उद्घोष से पंडाल गूंज उठा।
रासलीला मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि कृष्ण द्वारा पूतना, तृणावर्त व वत्सासुर का वध किए जाने से चिंतित कंस बकासुर को कृष्ण को मारने के लिए भेजता है। बकासुर एक विकराल वगुले का रूप धारण कर गोकुल पहुंचता है। विकराल वगुले को देखकर कृष्ण उसे पहचान लेते हैं। उसके समीप आते समय बकासुर कृष्ण को निगल जाता है।
पेट में पहुंचकर कृष्ण जलन पैदा करते हैं जिससे परेशान होकर बकासुर कृष्ण को उगल देता है। चोंच से मारने का प्रयास करता है। कृष्ण उसकी चोंच को पकड़ कर गर्दन मरोड़कर उसका वध कर देते हैं। बकासुर के वध पर कंस कृष्ण को मारने के लिए मायावी राक्षस अघासुर को भेजता है। अघासुर विशालकाय अजगर का रूप बनाकर आता है। अपना मुंह खोलकर गुफा के समान बना लेता है। कृष्ण के साथी मुंह खोले अघासुर के पेट में घुस जाते है। कृष्ण को भी बुला लेते हैं। कृष्ण के पेट में जाते ही अघासुर मुंह बंद कर लेता है। सभी ग्वाल कृष्ण से बचाने की गुहार लगाते हुए मूर्छित हो जाते हैं। इसके बाद कृष्ण अपना शरीर इतना विशाल कर लेते हैं कि अघासुर का पेट फट जाता है। इस तरह कृष्ण अघासुर का वध कर सभी ग्वालों को बचा लेते हैं। डा. विजय नारायण सिंह, अर्जुन गोपालन, प्रदीप मिश्रा, राजेश सिंह, आदित्यनाराय, आनंद विजय, राहुल सिंह बघेल आदि मौजूद रहे।