गंगा की उतरती लहरें जमकर उत्पात मचा रही हैं। कदम दर कदम कृषि योग्य भूमि निगलती जा रही है। चौबेछपरा गांव की तरफ रुख करती जा रही है। इसके चलते लोगों की धड़कने तेज हो गई हैं।
गंगा की उफनाती लहरें कृषि योग्य भूमि निगलती जा रही हैं। सोमवार को पचरूखिया से श्रीनगर तक करीब तीन एकड़ जमीन गंगा में विलीन हो गई।
चौबेछपरा गांव और गंगा नदी के बीच मात्र दस मीटर का फासला रह गया है। चौबेछपरा निवासी राजनारायण मिश्र, बसंत मिश्र, ऋषिदेव कमकर, राजेंद्र मिश्र, जनार्दन कमकर अपने सामानों को सुरक्षित ठोर देने में जुटे हैं।
गंगा की लहरें डेंजर जोन मझौंवा-पचरूखिया पर बने स्परों पर दबाव बढ़ाने लगी है। इससे निचले इलाकों में पानी फैलने के चलते डांगरबाद, शुक्लछपरा, जगछपरा, पोखरा, बाबूवेल के किसानों की खड़ी फसल डूबने से लाखों की क्षति हुई है।
साथ ही उनके साल भर की मेहनत की कमाई हुई फसलों पर पानी फिर गया। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार सोमवार शाम गंगा का जलस्तर 58.10 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का घटाव बना हुआ है।