पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आज पुण्यतिथि
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ऐसे थे चंद्रशेखर जिनकी शख्सियत से अपनी माटी अपना देश की खुशबू का अहसास होता था। सियासत के शिखर पर होने के बावजूद अपनी जड़ों से गहराई तक जुड़ी ऐसी शख्सियत अब कहां। इतिहास की समझ और राष्ट्रीय धरोहरों से ऊर्जा ग्रहण करने की जो तीक्ष्ण दृष्टि चंद्रशेखर में थी वह किसी दूसरे सामयिक नेता में नहीं।1984 में चुनाव हारने के बाद कई प्रस्तावों के बावजूद वह कहीं दूसरी जगह से चुनाव नहीं लङे, न पिछले दरवाजे से संसद में पहुंचे। 1985 से 1990 के बीच सक्रिय राजनीति के अलावा चंद्रशेखर ने जो सृजनात्मक कार्य किये हैं, वे उनके संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति के ही परिणाम है। सिताबदियारा में जेपी स्मारक, करौधी में राममनोहर लोहिया स्मारक, चंपारण, भीतहरवा में गाँधी आश्रम का जीर्णोद्धार, आचार्य नरेंद्र देव के नाम पर स्मृति-समारोह, लोगों से एक-एक रूपया लेकर कमर भर पानी-कीचड़ पार करते हुए, खुद ही इंट उठाते हुए, सफाई करते हुए, आधी रात तक काम करते हुए, उन पावन स्मृतियों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का ऋण और शारीरक श्रम का यह पहलू मौजूदा राजनेताओं में शायद अकेले चंद्रशेखर के हिस्से पङा है।
चंद्रशेखर के व्यक्तित्व मे ग्रामीण साहस, औदार्य, सरलता और आत्मविश्वास का समन्वय था। मस्तिष्क और ह्रदय का उनका समृद्ध समन्वय उनकी जेल डायरी में निखरा है। मुख्य रूप से राणा प्रताप सिंह, अनिल सिंह, पूर्व ब्लाक मनोज सिंह, भुवनेश्वर चौधरी, नागेंद्र पांडे, वंश बहादुर सिंह, उत्कर्ष सिंह, आलोक सिंह झुनझुन, दिन बंधु सिंह, तेजा सिंह आदि रहे।