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मनमाने तरीके से शुरू हुआ आवेदनों का निबटारा

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बलिया। जनसेवा केंद्रों के नवीनीकरण के बीच फंसे आवेदनों को निबटाने का काम विभिन्न तहसीलों में शुरू हो गया है। पखवारेभर पहले नवीनीकरण के चलते 30 हजार आवेदन फंसे हुए थे। हालांकि अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए कई आवेदनों को कोई न कोई बहाना बना कर निरस्त कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। क्योंकि छात्रवृत्ति आवेदन के लिए उन्हें प्रमाणपत्र नहीं मिल रहा और समय कम होने के कारण अब बनवाना भी मुश्किल हो रहा है। अमर उजाला ने 8 दिसंबर के अंक में पेज दो पर ‘जनसेवा केंद्रों का नवीनीकरण नहीं, फंसे 30 हजार आवेदन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। बीते एक पखवाड़े से जनसेवा केंद्रों के नवीनीकरण का कार्य दो सेवा प्रदाता एजेंसियों की ओर से किया जा रहा है। इसके चलते विभिन्न तहसीलों में करीब 30 हजार आवेदन एक माह से फंसे हुए थे। उधर अधिकारी इसे लेकर लापरवाही बरत रहे थे। खबर छपने पर सभी तहसीलों में आनन-फानन आवेदनों को निबटाने का काम मनमानी के बीच शुरू किया गया। बताया जाता है कि 15 दिनों से अधिक समय आवेदन लंबित होने पर जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान है लिहाजा अधिकारियों ने एक माह तक लंबित रखने के बाद उसे कोई न कोइ बहाना बना कर निरस्त कर दिया। बतौर उदाहरण, सोहांव निवासी दिलीप सिंह ने 31 अक्तूबर को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था और 8 दिसंबर को आवेदन निरस्त कर दिया गया। यही स्थिति अन्य तहसीलों की भी है। इसके चलते छात्रों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। क्योंकि छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि 15 दिसंबर निर्धारित है और अब आवेदन करने पर प्रमाणपत्रों के जारी होने में समय लगेगा। तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट सर्वर के अपडेशन के कारण आवेदनों का निबटारा प्रभावित था। अब सर्वर ठीक हो चुका है और आवेदनों के निबटारे में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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