माध्यमिक शिक्षा विभाग में जीपीएफ खाते से हुए 12 करोड़ के घोटाला के बावत रिकवरी को लेकर पूरे दिन जिला विद्यालय कार्यालय में छानबीन होती रही। कार्यालय में चौथे दिन भी वित्त विभाग के दोनों टीमों केे सदस्य पत्रावलियों को खंगालते रहे।
वर्ष 1994-95 व वर्ष 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से कुल 104 अनियमित शिक्षकों को बतौर वेतन 12 करोड़ का भुगतान किया गया। हालांकि इसका खुलासा वर्ष 2002 में हुआ और विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा भी कराया लेकिन इसका कोई असर अफसरों पर नहीं पड़ा और इसके बाद वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा। बताया जाता है मुकदमा दर्ज कराने के बाद विजिलेंस ने दोषियों से 12 करोड़ की रिकवरी करने की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट दी थी।
इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन के वित्त विभाग की दो टीमें जिले में पहुंची है। शनिवार को चौथे दिन भी वित्त विभाग के सहायक लेखाधिकारी रवि प्रकाश द्विवेदी व शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव की टीमों के आधा दर्जन सदस्य जीपीएफ खाते से किए गए भुगतान से संबंधित पत्रावलियों की पड़ताल करते रहे ताकि रिकवरी के लिए संबंधित को तय किया जा सके। हालांकि टीम के सदस्य जांच व रिकवरी को लेकर कुछ बोलने से बचते रहे लेकिन इतना जरुर बताया कि दोषियों में सात तत्कालीन डीआईओएस, दो वित्त एवं लेखाधिकारी के अलावा संबंधित विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य हैं। पत्रावलियों से प्रबंधक व प्रधानाचार्य के बावत जानकारी जुटाई जा रही है। उधर, जीपीएफ खाते से भुगतान लेने वाले शिक्षकों में हड़कम्प मचा हुआ है।