बलिया। कोरोना के चलते लॉकडाउन होने से सब्जी उत्पादक सब्जियों को गैर जनपदों में नहीं भेज पा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी सब्जी की वाजिब कीमत नहीं मिल रही है। इसके चलते सब्जी उत्पादकों को लागत भी नहीं निकल पा रहा है। स्थिति यह है कि वे जिले के अलग-अलग इलाकों में परवल 5 रुपये, करैला 5 रुपये, खीरा रुपये, हरी मिर्च 8 रुपये किलो तक बेचने को मजबूर हैं। लौकी दो रुपये प्रति पीस की दर से भी कोई खरीदने वाला नहीं है। मजबूरी में किसान सब्जियों को गाय, भैंसों को खिलाने के लिए मजबूर हैं।
बैरिया : लॉकडाउन में अधिकांश सब्जी बाजार बंद हैं। इसके चलते हरी सब्जी का भाव काफी गिर गया है। लौकी का भाव दो रुपये प्रति पीस तक आ गया है। इसके भी पूरे खरीदार नहीं हैं लिहाजा इसे गाय, भैंस को खिलाना पड़ रहा है। मधुबनी निवासी किसान मुन्ना वर्मा ने बताया कि सतपुतिया, परवल, भिंडी, बरबट्टी, खीरा पांच रुपये किलो भी खरीदने वाला कोई नहीं है। मधुबनी के ही हृदयानंद वर्मा ने बताया कि लौकी की खेती ने तो हम किसानों की कमर ही तोड़ दी है। दो रुपये की एक लौकी के दर से भी कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। भगवानपुर निवासी त्रिलोकी प्रसाद मौर्य ने कहा कि लॉकडाउन के कारण बिहार व बंगाल सब्जियों की खेप नहीं जा पा रही है। इससे सब्जियों का भाव निचले स्तर पर चला गया है।
श्रीनगर निवासी संतोष वर्मा ने कहा हम किसान हर साल सब्जी की खेती करते हैं कुछ न कुछ मुनाफा हो जाता है। लेकिन इस बार तो खेती में लागत निकलना भी मुश्किल लग रहा है।
नरही : इलाके के किसान दियारे में बड़े पैमाने पर परवल, करैला, लौकी, नेनुआ, भिंडी, खीरा, ककड़ी, खरबूज, तरबूज आदि की खेती करते हैं। लॉकडाउन ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने बताया कि प्रति कुंतल हरा मिर्च 800 रुपये, नेनुआ 500 रुपये, परवल 500 रुपये, भिन्डी 400 रुपये, टमाटर 800 रुपये, करैला 400 रुपये, तरबूज 800 रुपये की दर से बेचना पड़ रहा है। इसके अलावा लौकी 2-3 रुपये प्रति पीस, ककड़ी एक रुपये में दो पीस तक बेचना पड़ रहा है।