गर्मी में तरावट और ताजगी देने वाले आम के जूस भी सुरक्षित नहीं है। बाजार में इन दिनों सड़कों के किनारे और फुटपाथ पर 10-20 रुपये गिलास आम का जूस यानी मैंगो शेक धड़ल्ले से बिक रहा है। सौ रुपये किलो के आम का 10-20 रुपये में जूस मिलना अपने आप में संदिग्ध हो जाता है।
धंधे से जुड़े लोग बताते हैं कि यह कृत्रिम फ्लेवर का चमत्कार है। इसमें आम नाम मात्र का होता है। आम जैसा स्वाद लाने के लिए इसमें एसेंस व कलर के लिए दूध के अलावा अन्य केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसमें बर्फ की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। इस कारण एक गिलास शेक की लागत अधिकतम तीन से चार रुपये होती है।
डॉक्टर बताते हैं कि इसके सेवन से डायरिया, फूड प्वॉइजिंग, आंत में इंफेक्शन, अल्सर, गुर्दे और लिवर आदि की बीमारियां हो सकती हैं। गर्मी में डायरिया के वायरस एवं बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय होने के साथ आसानी से एक जगह से जगह अपनी पहुंच बना लेते हैं।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के बाजारों में आम का भाव 120 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक है। आम तौर पर एक गिलास जूस के लिए 100 ग्राम आम, चीनी, बर्फ और थोड़ा सा पानी की जरूरी होती है। इस हिसाब से एक गिलास आम का जूस निकालने में सिर्फ सामग्री की लागत ही करीब 20 रुपये आती है।
ऐसे में 10 रुपये में बिक रहा आम का जूस शक के दायरे में है। एक जूस विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम नींबू का एक गिलास शरबत भी 10 रुपये में बेचते हैं। आम का शुद्ध जूस तो इससे कहीं ज्यादा महंगा पड़ता है। ऐसे में 10 रुपये में आम का जूस केवल फ्लेवर और रंग का खेल है। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता है। सस्ते के चक्कर में लोग इसका सेवन करते हैं।
सेहत के लिए हानिकारक
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. पंकज झा ने बताया कि फ्लेवर वाले जूस में शामिल तत्व सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर, प्रिजर्वेटिव और रंग शामिल होते हैं। यह पाचन तंत्र, किडनी और हृदय पर बुरा असर डाल सकते हैं।
मिलावटी जूस एसिडिटी, गैस और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं। इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया जाता है, जो किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कुछ जूस में केमिकल रंग भी मिलाए जाते हैं।
फ्लेवर वाले जूस में अक्सर चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो वजन बढ़ाने, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे जूस का सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसकी जगह घर पर ताजे फलों से बना जूस पीना अधिक सुरक्षित और फायदेमंद होता है।
आर्टिफिशियल फ्लेवर व रंग
एक दुकानदार ने बताया कि सस्ते जूस के नाम पर आम फ्लेवर और रंगों का घोल तैयार किया जा रहा है। उसे बर्फ और मीठे पानी के साथ मिलाकर आम का जूस के नाम से बेचा जा रहा है। यह जूस पीने में स्वादिष्ट तो होता है, लेकिन इसका आम से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे गाढ़ा बनाने के लिए सैकरीन मिलाई जाती है, जो कि चीनी से कई गुना हानिकारक है।
ऐसे जूस बनाने की जानकारी नहीं मिली है। गर्मी के सीजन में खाद्य पदार्थों की लगातार जांच की जा रही है। यदि ऐसा है तो जूस की दुकानों से नमूना लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। लोगों को भी खाद्य पदार्थों के प्रयोग के समय सावधानी बरतनी चाहिए।
-डॉ.वेद प्रकाश मिश्रा, सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय।