पुलिस ने दुकान को किया सील
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इसके बाद कनपटी पर पिस्टल से गोली मारकर जान दे दी। लाइव वीडियो में खुदकुशी देख लोगों में हड़कंप मच गया। दुकान पर रहने वाला युवक मोनू अपने घर से भागा-भागा दुकान पर पहुंचा, वह मालिक नंदलाल को खोजने लगा। दुकान अंदर से बंद दी। बगल से दुकान के अंदर का नजारा देख दंग रह गया। अंदर कुर्सी पर खून से लथपथ नंदलाल का शव पड़ा था।
वह चिल्लाने लगा। ऊपर पत्नी मोनी, दो बच्चे व छोटा भाई शैलेश के साथ थी। चिल्लाने की आवाज सुन सभी नीचे दुकान पर पहुंचे। वहां का नजारा देख होश उड़ गए। लोगों ने ई-रिक्शा से नंदलाल को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
असलहा दुकान के बाहर खड़ी पुलिस
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असलहा व्यापारी के आत्महत्या की खबर फैलते ही सूदखोरों में खलबली मच गई। बताया जा रहा है कि व्यापारी नंद लाल गुप्ता ने दर्जनों लोगों से सूद पर कर्ज लिया था। माह का पहला दिन होने के कारण नंदलाल की दुकान पर कई लोग सुबह पैसा की तगादा के लिए पहुंचे थे, जिसको लेकर वह काफी परेशान थे। घटना के बाद सूदखोरों के गुर्गे चोरी-छिपे पुलिस व परिजनों की गतिविधि की पल-पल की आह ले रहे थे। घटना में किस का नाम आ रहा यह जानने के लिए काफी परेशान दिखे।
असलहा व्यापारी नंदलाल सुबह दुकान पर रहने वाले एक लड़के के साथ कचहरी गए थे। वहां से करीब एक बजे दुकान लौटे। लोगों में चर्चा है कि नंदलाल किसी सूदखोर के दबाव में मकान को रजिस्ट्री करने गए थे। लाइव वीडियो में भी नंदलाल ने इसका जिक्र किया है।
जिसका कागज कल ही कुछ लोगों ने बनवा लिया था। मकान के प्रथम तल पर असलहा दुकान व दूसरे तल पर परिवार रहता था। कचहरी से लौटने के बाद ऊपर न जाकर सीधे दुकान में जाकर नंदलाल फेसबुक लाइव आए। दुकान अंदर से बंद थी। यही कारण रहा कि गोली चलने के बाद किसी को पता नहीं चल सका।
असलहा व्यापारी नंदलाल गुप्ता
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सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाने के बावजूद जिले में सूदखोरी का बड़ा व्यवसाय है। जरूरतमंदों को सहूलियत से कर्ज मिल जाता है। इसमें छोटे से बड़े व्यापारी, कर्मचारी व आमलोग शामिल हैं। व्यवसाय में बड़े-बड़े लोग भी शामिल हैं, जिनकी राजनीतिक गलियारे में अच्छी पकड़ है। चाहे प्रदेश में सरकार किसी पार्टी की भी हो।
वह पर्दे के पीछे यह व्यवसाय बेखौफ संचालित करते हैं। उनके गुर्गे लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। इनके अत्याचारों के कारण कई परिवार बेघर व जिला छोड़ने को मजबूर हो गए। कुछ आत्महत्या तक कर चुके हैं। ऊंची पहुंच होने के कारण कानून से बार-बार यह बच जाते हैं। चाहे कानून व्यवस्था कितना भी कठोर हो।