शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए स्तनपान अत्यंत आवश्यक है। शिशु को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। कामकाजी महिलाओं को भी छह माह तक स्तनपान कराने के लिए सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है। उनके लिए अनिवार्य रूप से मातृत्व अवकाश आवश्यक है।
यह बातें विश्व स्तनपान दिवस पर आफिसर्स क्लब में इनरह्वील क्लब के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डा. आशु सिंह ने व्यक्त की।
उन्होंने कहा है कि विश्व स्तनपान सप्ताह एक साथ 120 देशों में मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अमेरिकन अकादमी आफ पीडिएट्रिक्स ने नवजात को जन्म के प्रथम छह माह तक केवल मां का दूध एवं उसके बाद मां के दूध के अलावा अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने की सलाह देता है।
डा. सिंह ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे के लिए मां का दूध अमृत के समान हैं। सामान्य प्रसव के आधे घंटे के भीतर तथा सिजेरियन के तीन घंटे के बाद बच्चे को स्तनपान शुरू करा देना चाहिए। प्रथम तीन दिनों तक मां के स्तन से निकलने वाला गाढ़ा पीला द्रव जिसे कोलेस्ट्रम कहते हैं, नवजात के लिए बहुत उपयोगी एवं पर्याप्त होता है।
कामकाजी महिलाएं अपने दूध को साफ कटोरी में निकालकर रख सकती है। स्तनपान से ही शिशु मृत्युदर में कमी लाई जा सकती है। संगोष्ठी में डा. अमिता रानी, उषा पांडेय, सविता श्रीवास्तव, कविता सिंह, रश्मी गुप्त, सोनियां सिंह, नंदिनी तिवारी, शैल अग्रवाल, चंद्रवाला राय, मधु श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।