घोघा। भारतीय कृषि अनुसंधान पूसा नई दिल्ली की ओर से बेरुआरबारी ब्लाक के मिश्रवलिया में काले रंग का गेहूं की बुवाई जीरो टिल तकनीकी से की गई है। गांव के विष्णु कुमार ओझा के दो एकड़ खेत का चयन कर इसकी बुवाई की गई है।
जैव ऊर्जा बोर्ड लखनऊ से पहुंचे प्रभाशंकर ओझा ने बताया कि काले रंग का गेहूं औषधीय गुणों से परिपूर्ण है, इस प्रजाति की मांग ज्यादा है। इसकी पैदावार अधिक होती है। इस गेहूं के उपयोग से ब्लड प्रेशर शुगर, दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। उन्होंने बताया कि नेशनल एग्री फूड बायो टेक्नोलॉजी इंस्टिट्यूट मोहाली द्वारा सात साल की रिसर्च के बाद काले गेहूं का पेटेंट करा लिया है । इस गेहूं को नाबी एमजी नाम दिया है। काले रंग वाला यह गेहूं आम गेहूं से कई गुना पौष्टिक है जो तनाव, मोटापा, कैंसर, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों को रोकथाम में मददगार साबित होता है। देश में यह पहली बार पंजाब में उगाई गई है। वैसे ट्रायल के तौर पर इसका पहले ही किसानों के माध्यम से 850 क्विंटल उत्पादन किया जा चुका है ।
आम गेहूं में जहां एंथोसाइन की मात्रा 5 से 15 प्रति मिलियन होती है वही ब्लैक गेहूं में 40 से 140 प्रति मिलियन पाई गई है। एंथोसाइन इन ब्लू बेरी जैसे फलों की तरफ से सेहत को लाभ प्रदान करता है ।यह शरीर से फ्री रेडिकल निकालकर हार्ट, कैंसर, डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों की रोकता है ।इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है। बताया कि ब्लैक गेहूं जो किसान पैदावर कर उगाना चाहते है व उसको एनएबीआई को अपनी वेबसाइट के माध्यम से गेहूं बेच सकते हैं। किसान विष्णु कुमार ओझा ने बताया कि अगले साल बड़े पैमाने पर बोर्ड की सहायता से गेहूं की पैदावार किया जाएगा। इसके साथ ही सरसों के कई प्रजातियों के बीज भी लगाया जाएगा जिससे कि तिलहन शुद्ध रूप से मिल सके।