ददरी मेले में भूमी पुजन के दौरान सांसद विधायक व नवागत डीएम को स्वागत करते सभासद।
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बलिया। महर्षि भृगु मुनि के शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर गंगा के किनारे लगने वाले ऐतिहासिक ददरी मेला के मद्देनजर सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन हुआ। मुख्य अतिथि सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने भूमि पूजन किया।
इस दौरान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि मेला मेल का पर्याय है। ददरी मेला बलिया की पहचान है। यह धरती बागी बलिया और भृगु नगरी के नाम से जानी जाती है। यहां पर एक से बढ़ कर एक ऋषि मुनियों ने तप किया है और सेनानियों ने जन्म लिया है। कहा कि सुरक्षा जीवन की पहली प्राथमिकता है। विश्वास दिलाता हूं कि मेले में आए मेलार्थियों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अंत में नगर पालिका अध्यक्ष अजय कुमार और नगर पालिका के ईओ दिनेश विश्वकर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। इस मौके पर जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही, पुलिस अधीक्षक देवेंद्र नाथ, एडीएम रामआसरे, सदर एसडीएम अश्विनी श्रीवास्तव, मेला प्रभारी विवेक पांडेय, नगर पालिका के लेखाधिकारी अलीम खान, भारतभूषण, प्रमोद चौरसिया आदि मौजूद रहे।
पिछले साल से चार लाख बढ़ी पशु मेला की आमदनी : बलिया। ऐतिहासिक ददरी मेले के नंदीग्राम पशु मेले में छठ पूजा के बाद खरीद-फरोख्त तेज होने से नगर पालिका की आमदनी बढ़ी है। पिछले साल की तुलना में अब तक के मेले में करीब चार लाख रुपये की अधिक आमदनी हुई है। नंदीग्राम अब तक मुनाफे में ही चल रहा है। जबकि नंदी ग्राम पशु मेले में मवेशियों के आने का क्रम जारी है। पंजाब, हरियाणा, बिहार, बंगाल आदि के पशु व्यापारी आने लगे हैैं। खरीददार भी पहुंचने लगे हैं। दूसरी ओर शहर के आसपास के लोग मेला परिसर में अपने पशुओं को न ले जाकर सड़क किनारे ही बेच दे रहे हैं। इससे कदम चौराहे से लेकर टोल टैक्स तक वाहनों की रफ्तार धीमी हो जा रही है। पशु व्यापारियों को कोई असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। प्रकाश व पानी की व्यवस्था में कर्मचारी जुटे हैं। नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष अजय कुमार ने व्यापारियों की समस्याएं सुनीं और उसे दूर करने का भरोसा दिया। नगर पालिका की मानें तो पिछले साल नंदी ग्राम पशु मेले में तीन नवंबर तक मात्र 11 लाख 36 हजार ही आय हुई थी जबकि इस साल मवेशियों के पंजीकरण तथा बिक्री के रूप में 15 लाख 23 हजार पांच सौ रुपये की आमदनी हुई है।
ददरी मेले को नहीं मिला राष्ट्रीय दर्जा : बलिया। जिले के प्रसिद्ध ददरी मेला को राष्ट्रीय मेला का दर्जा दिलाने का भरोसा कई नेताओं ने दिया लेकिन यह संभव नहीं हो सका। अंबिका चौधरी ने अपने मंत्रित्व काल में ददरी मेले को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के साथ मेले के लिए अलग फंड जारी कराने का आश्वासन दिया लेकिन मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा नहीं दिला सके। 2015 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नारद राय ने भी मेले को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने के लिए जोर लगाया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ ही सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के पास प्रस्ताव भी रखा गया। इसके बाद भरत सिंह ने ददरी मेला को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने के लिए भारत सरकार के पर्यटन राज्य मंत्री केजे अल्फोंस से मुलाकात की थी लेकिन ददरी मेला को राष्ट्रीय मेले का दर्जा नहीं मिल सका। सोमवार को ददरी मेला स्थल पर भूमिपूजन के दौरान जब इस विषय पर राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल से बात की गई तो उन्होंने भी ददरी मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिलाने का आश्वासन दिया।