बलिया/मझौवां। गंगा का जलस्तर बढ़ने से 20 से ज्यादा गांव पानी से घिर गए हैं। बाढ़ के कारण करीब 1500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है। बैरिया में बाढ़ से 20 से ज्यादा गांवों की बिजली काटी गई है। उधर, सरयू की बाढ़ से टापू बने भोजपुरवा गांव से 60 लोगों को एनडीआरएफ ने बाहर निकाला।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर सोमवार की शाम चार बजे गंगा नदी का जलस्तर 58.780 मीटर दर्ज किया गया। नदी लाल निशान 57.615 मीटर से 1.165 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं प्रशासन की तरफ से बनाई गई बाढ़ चौकियों पर दिन में राजस्व कर्मी रहते हैं लेकिन शाम होते ही सन्नाटा पसरा जाता है। किसान धूपनारायण सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता कई बार सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है।
उधर बैरिया में गंगा व सरयू नदी के बाढ़ के चलते बिजली विभाग की तरफ से 20 से ज्यादा गांवों की विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई हैं। जिन गांवों की विद्युत आपूर्ति बंद की गई हैं उसमें बकुल्हा पूर्वी, गोपालनगर, दुर्जनपुर, बैज के डेरा, पिआरी, फतेहराय के टोला बलुइया बाबा के डेरा, भवन टोला पूर्वी, रामपुर कोडरहा, सेमरिया, मिश्र गिरी के मठिया, गोपालपुर, दूबेछपरा सहित एक दर्जन से ज्यादा गांव शामिल हैं। अवर अभियंता अभिराम प्रणय ने बताया कि सुरक्षा कारणों ने बिजली आपूर्ति बंद की गई है। जैसे ही बाढ़ का पानी कम होगा वैसे ही बिजली आपूर्ति चालू कर दी जाएगी।
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गंगा में उफान आते ही हमारी रातों की नींद हराम हो जाती है। नदी की उग्र धारा से उठने वाली आवाज से पूरा परिवार दहशत में रहता है, क्योंकि हमारा मकान नदी के मुहाने पर है। कटान की आशंका को देखते हुए बहू को मायके और बेटी को ननिहाल भेज दिया है। -रामनिवास ठाकुर, भुआल छपरा
बाढ़ आते ही हम लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह जाते हैं। गांव और आबादी को सुरक्षित करने के नाम पर अब तक अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन आज भी लोग बाढ़ और कटान के खतरे से महफूज नहीं हैं। - वीरेंद्र तिवारी, गोपालपुर
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मैं खेती व मजदूरी कर मकान बनवाया था। अब तो न घर बचा, न खेत। अब मैं एक भाई को लेकर सड़क किनारे रहता हूं। पत्नी छोटी बच्चीं को लेकर मायके गई है। अपने बच्चों की पढ़ाई छूटने का गम भी है। -पवन ठाकुर, चक्की नौरंगा ।
रात को डर के मारे नींद नहीं आती। तीन बेटियों के साथ तटबंधें पर ठहरा हूं। बारिश के दौरान प्लास्टिक की चादर से पानी टपकता है, पूरा परिवार भीगकर रात काटने के लिए मजबूर है। हमने कर्ज लेकर घर बनाया था अब न घर है, न पैसे। -उमाशंकर साहू, चक्की नौरंगा
गंगा का जलस्तर घटा, गलियों में ठहरा बाढ़ का पानी
दया छपरा। गंगा नदी के जलस्तर में सोमवार को कमी दर्ज होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि गांव की गलियों और नालियों में पहुंच चुका बाढ़ का पानी अभी भी ठहरा है। पानी निकलने में अभी समय लगने की संभावना है। जलस्तर घटने के बावजूद दया छपरा क्षेत्र में बाढ़ का असर बरकरार है। गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से ऊपर है। ऐसे में ग्रामीणों की निगाह नदी के जलस्तर पर टिकी हुई है। संवाद