टाउन हाल में रविवार को आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन इकाई के आठवें अधिवेशन में बिहार आैर उप्र के भोजपुरी विद्वानों, कवि और साहित्यकारों ने भाग लिया। इस दौरान वक्ताओं ने भोजपुरी को एक भाषा के रूप में मान्यता देते हुए आठवीं सूची में शामिल करने की मांग की। इस दौरान कन्हैया पांडेय के कहानी संग्रह 'जिनगी के जूआ ' का विमोचन भी किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतराष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरुणेश नीरन ने कहा कि यह समय करोड़ों भोजपुरीभाषी के जागरण का है। उन्होंने कहा साहित्य कला और संगीत के अलावा नाटक और फिल्मों में भोजपुरी की दमदार उपस्थिति है। सोशल साइट पर भी इस भाषा का नवजागरण देखने को मिलता है। इस दौरान शीला शुक्ल, डॉ. बृजभूषण, डॉ. जयकांत सिंह, डॉ नीरज सिंह ने भोजपुरी भाषा के अध्ययन, अनुसंधान के संदर्भ में हो रहे कार्यों की चर्चा की। राष्ट्रीय सचिव व भोजपुरी पत्रिका पाती के संपादक डाॅ. अशोक द्विवेदी ने मुख्य अतिथि व विशिष्ठ अतिथियों को शाॅल देकर सम्मानित किया गया।
यशस्वी साहित्यकारों डॉ. बृजभूषण मिश्र और कन्हैया पांडेय को पाती अक्षर सम्मान, स्मृति चिह्न और शाल देकर सम्मनित किया गया। इस मौके पर डा. प्रकाश उदय, डाॅ. भगवती प्रसाद द्विवेदी, डाॅ. कमलेश राय, दयाशंकर तिवारी, मिथिलेश गहमरी, अक्षय पांडेय के साथ ही जिले के साहित्यकार विजय मिश्र, अशोक द्विवेदी, डाॅ. शत्रुघ्न पांडेय, शिवजी पांडेय रसराज, अशोक कुमार तिवारी आदि लोगों ने काव्यपाठ किया।