बलिया। जनपद वासियों की क्रांतिकारी छवि एवं देश प्रेम की गाथाएं सुनकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 16 अक्टूबर 1925 को स्वयं बलिया आए थे। इस दौरान उनका बलिया जिला परिषद हाल में नागरिक अभिनंदन किया गया था। तब मंच से बापू ने जिले की गंगा-जमुनी तहजीब की प्रशंसा की थी। इसका उल्लेख जिले के बेल्थरारोड तहसील के मिश्रौली गांव निवासी अजय कुमार मिश्र द्वारा लिखित भगत की विरासत पुस्तक में मिलता है। इसका प्रकाशन वर्ष 2019 में हो चुुका है।
पुस्तक में उल्लेख है कि जनपदवासियों को संबोधित करते हुए तब गांधी जी ने कहा था कि , ‘मैं 1921 में ही बलिया आना चाहता था, अब चार वर्ष बाद आप लोगों के बीच आकर बहुत खुश हूँ। समयाभाव न होता तो मैं आप लोगों के साथ अधिक समय तक रहता( इसका का मुझे दु:ख है। बलिया वासियों की शक्ति में तो मुझे विश्वास है, किन्तु मैं मानता हूँ कि कार्यकर्ताओं की संगठन क्षमता से ही शक्ति को नियंत्रण में रखा जा सकता है। चूंकि मैं अब कमजोर और अशक्त हो गया हूँ और भीड़भाड़ तथा शोरगुल को नहीं सह पाता हूँ। इसलिए मैंने आशा की थी कि इस प्रकार की सभाओं से मुझे जो तकलीफ होती है उसका अवसर यहां नहीं आएगा। बलिया के कार्यकर्त्ताओं ने जो रचनात्मक कार्य किया है, उसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई है और उसके लिये मैं उनको बधाई देता हूँ। मुझे यह जानकर भी प्रसन्नता हुयी है कि यहां दोनों कौमे मिल जुल कर रह रही हैं। ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आपकी मित्रता की यह टेक पूरी हो और आप इस दिशा में दूसरे के लिये आदर्श स्थापित कर सकें..।’ गरीबी मिटाने के लिए गांधी जी ने कहा कि इसे दूर करने के लिए चरखे से बढ़कर कोई और उपाय नहीं है। खादी पहनो और चरखे की शक्ति बढ़ाओ।