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रेलवे स्टेशन बलिया को भले ही मॉडल स्टेशन का दर्जा दिया गया है लेकिन अभी भी यहां यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है। यात्रियों को बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था से लेकर कई अत्याधुनिक सुविधाएं अभी भी यहां नहीं है। इसको लेकर यहां के यात्री भी स्टेशन को उपेक्षित महसूस करते हैं।
बलिया रेलवे स्टशेन को माडल स्टेशन का दर्जा मिले काफी समय हो गया, लेकिन यात्री सुविधाओं का जिक्र किया जाए तो अभी भी कई ऐसी सुविधाएं यहां नहीं हैं, जो माडल स्टेशनों पर होनी चाहिए। जिले के मॉडल रेलवे स्टेशन पर दिन प्रतिदिन जनसंख्या का दबाव तो बढ़ रहा है लेकिन यात्री सुविधाएं नहीं बढ़ रही हैं। यहां पार्सल घर की व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते स्थानीय लोगों को अपने सामानों पर कहीं भेजने में दिक्कत होती है।
इस स्टेशन पर रेल मंत्रालय की योजना के तहत बलिया छपरा रेल खंड के दोहरीकरण कवायद शुरू हुई, इसके लिए दो-दो बार सर्वे भी कराया गया लेकिन यह योजना अधर में लटकी हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर जी के प्रयास से 12 अगस्त 2008 को इस स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा मिला था। लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है।
जिलेवासियों को उम्मीद थी कि सांसद नीरज शेखर रेल मंत्रालय के समक्ष इस स्टेशन के विकास के लिए प्रस्ताव और मांग रखेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इस स्टेशन से सिर्फ सियालदा एक्सप्रेस ही खुलती है। रेलवे स्टेशन सुंदरीकरण के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अभी भी इस स्टेशन पर फूड प्लाजा नहीं खोला जा सका है। इस स्टेशन पर 12 बोगियों की वाशिंग पिट है। जिसे ट्रेनों की धुलाई सहीं से नहीं हो पाती है। 24 बोगियों वाशिंग पिट की मांग रखी, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई।