वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए उन्हें छपरा सदर अस्पताल रेफर कर दिया। घटना के बाद पुल निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों में भय और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बंदरों का आतंक बना हुआ है और अब उनका उत्पात निर्माणाधीन रेल पुल तक पहुंच गया है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में और भी गंभीर हादसे हो सकते हैं। क्षेत्र के जयप्रकाश सिंह, ब्रजेश सिंह, बिजेंद्र यादव और धर्मेंद्र यादव सहित अन्य लोगों ने रेलवे प्रशासन एवं संबंधित विभागों से निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा बंदरों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
कर्णछपरा में बंदरों के आतंक से दहशत, बुजुर्ग को किया गंभीर रूप से घायल
विकास खंड मुरली क्षेत्र के शिवपुर उर्फ कर्णछपरा गांव में भी बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को गांव निवासी देव प्रसाद सिंह (68) पर एक लाल बंदर ने हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
ग्रामीणों के अनुसार कर्णछपरा और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों का झुंड लंबे समय से उत्पात मचा रहा है। अब तक दर्जनों लोग उनके हमले का शिकार हो चुके हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
प्रधान प्रतिनिधि हरिजी सिंह, दुर्गविजय सिंह ‘झलन’, माधवेंद्र प्रताप सिंह, भोला सिंह, अरुण कुमार सिंह और गुड्डू सिंह ने बताया कि गांव वर्षों से बंदरों के आतंक से जूझ रहा है। इसके संबंध में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार विभाग उदासीन बना हुआ है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाकर हमलावर बंदरों को पकड़ने तथा उन्हें आबादी से दूर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ने की मांग की है। क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में दहशत और आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है।