बलिया। जननायक चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत में आईं कुलाधिपति एवं प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लगभग 35 मिनट तक समारोह को संबोधित किया। उन्होंने किसी को परिषदीय विद्यालयों की हालात सुधारने का निर्देश दिया तो किसी को स्वास्थ्य का ध्यान रखने का। उन्होंने अभिभावकों से परिषदीय विद्यालयों में मिड डे मिल की गुणवत्ता परखने का भी आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि अब तक मैं लगभग 34 जिलों में जा चुकी हूं। जहां जाती हूं परिषदीय स्कूलों में जरूर जाती हूं। जिले का नाम तो नहीं याद, लेकिन एक परिषदीय स्कूल में थी तभी अचानक दो बच्चियां गिर पड़ीं। पूछताछ में पता चला कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है। वह रोज घर से खाली पेट आती हैं और जब तक स्कूल में मिड डे मिल नहीं मिलता, भूखी रहती हैं। उन्होंने हाल में बैठे लोगों से जानने का प्रयास किया है कि आपके यहां के स्कूल में जो भोजन बनता है वह कितना गुणवत्तापरक होता है। बोलीं मैं तो गुजरात से आई हूं, ऐसी गरीबी नहीं देखी, लेकिन यहां के लोगों को तो जागरूक होना चाहिए। लोग कहते हैं वह सरकारी स्कूल हैं तो हम क्यों जाएं, क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं बनती कि आप अपने गांव के स्कूल में एक बार जरूर जाएं और देखें कि स्कूल में सब्जी अच्छी खरीदी गई है या नहीं, बच्चों को जो भोजन परोसा गया है वह गुणवत्तापरक है या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार तो दे रही है, लेकिन वह हर जगह पहुंचकर देख नहीं सकती, वह काम तो आपको ही करना होगा। आज ये प्रण लें कि हर गांव में वरिष्ठ और सम्मानित लोग सप्ताह में एक बार स्कूल में जरूर जाएं और वहां गरीब बच्चों को मिलने वाले भोजन व शिक्षा के स्तर की परख जरूर करेंगे। आप जागें, क्योंकि ये बच्चे ही हमारे भविष्य हैं, यदि भविष्य सुधारना है तो ये करना होगा।
आनंदीबेन पटेल ने शादी विवाह समारोह में भोजन की बर्बादी से बचने की सलाह दी। कहा यदि इसमें सुधार हो जाए तो तीस प्रतिशत भोजन बचेगा और कम खाने से आपको डॉक्टर के यहां भी कम जाना होगा। बचा भोजन कई लोगों का पेट भरने के काम भी आएगा। इसके बाद उन्होंने डायस पर शीशे का गिलास उठाया और बोलीं पानी बचाएं। उन्होंने कहा कि राजभवन में सबको निर्देश है पानी आधा गिलास ही दो। जरूरत होगी तो और ले लिया जाएगा, लेकिन कोई आधा पीकर रख दे तो उसे फेंकना ही पड़ेगा।