महिलाओं की अगुवाई धनेश्वरी देवी, तेतरी देवी, राम झरिया देवी कर रही थीं। भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह, परशुराम सिंह, बलदेव सिंह, हरदेव सिंह, राजकिशोर सिंह, बैजनाथ साह, राजकुमार मिश्र आदि भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। थाने पर भीड़ को देख थानेदार ने थाने की छत पर सिपाहियों संग पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया। इसी बीच कुछ लोग थाने में बगल से घुस गए और थाने के घोड़े को खोलकर अस्तबल ध्वस्त कर दिया। इसके बाद भीड़ थाने में घुस गई। यह देख पुलिस ने गोलियां चलाई तो क्रांतिकारियों ने पथराव कर दिया। इसी बीच कौशल कुमार सिंह छलांग लगाकर थाने की छत पर पहुंच गए और जैक उतारकर तिरंगा फहरा दिया, लेकिन पुलिस की गोली से वह शहीद हो गए। शाम तक चले इस संघर्ष में कुल 19 लोग शहीद हो गए।
शहीद होने वालों में कौशल सिंह के अलावा गोन्हिया छपरा निवासी निर्भय कुमार सिंह, देवबसन कोइरी, विशुनपुरा निवासी नरसिंह राय, तिवारी के मिल्की निवासी रामजनम गोंड, मिल्की मठिया के विद्यापति गोंड, चांदपुर निवासी रामप्रसाद उपाध्याय, टोलागुदरीराय निवासी मैनेजर सिंह, सोनबरसा निवासी रामदेव कुम्हार, बैरिया निवासी रामबृक्ष राय, रामनगीना सोनार, छठू कमकर, देवकी सोनार, शुभनथही निवासी धर्मदेव मिश्र, मुरारपट्टी निवासी श्रीराम तिवारी, बहुआरा निवासी मुक्तिनाथ तिवारी, श्रीपालपुर निवासी विक्रम सोनार व विक्की राम, भगवानपुर निवासी भीम अहीर शामिल थे। दयाछपरा निवासी गदाधरनाथ पांडेय, मधुबनी निवासी गौरीशंकर राय, गंगापुर निवासी रामरेखा शर्मा सहित तीन क्रांतिकारी जेल यातना में शहीद हो गए। इसके अलावा, कितने क्रांतिकारियों को जेल की कालकोठरी में डाल दिया गया, जिसका नाम तक प्रकाश में नहीं आ सका।