गाजियाबाद से झारखंड के देवघर के लिए पैदल चलकर मठ योगेंद्र गिरी पहुंचे मजदूर ।
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बैरिया। एनएच 31 से होकर बिहार व झारखंड के अलग -अलग जनपदों के मजदूरों के जाने का सिलसिला अब भी जारी है। कुछ मजदूर पैदल ही सिर पर सामानों की गठरी लेकर चल रहे हैं। कई लोगों को तो इस तपती दोपहरी में चलते-चलते पैरो में छाले तक पड़ गए हैं। तो कुछ ट्रक, पिकअप, बस व बोलेरो में भर भर कर बिहार की तरह जा रहे हैं। यहां तक कि पिकअप में क्षमता से अधिक सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए लोग सफर कर रहे हैं। कई मजदूर तो अपनी परेशानी बताते बताते रोने तक लगते हैं। वाकई दुख और दर्द क्या होता है इन मजदूरों के माध्यम से सुनकर अंदाजा लगाया जा सकता है। मुम्बई से मजदूरों से भरी दो ट्रक बैरिया के रास्ते बिहार राज्य के पूर्णिया जा रही थी। अभी दोनों ट्रक मांझी जयप्रभा सेतु तक पहुंची थी कि भारी वाहनों के आवागमन पर रोक होने के कारण उन ट्रकों को पुलिस ने लौटा दिया। जिससे पुन: दोनों ट्रक बैरिया पहुंची। ट्रक के चालक नगर पंचायत के मजदूरों से पूछ रहे थे कि यहां कुछ खाने पीने की दुकानें हैं लेकिन मजदूरों ने कहा कि नगर पंचायत हॉटस्पॉट हो गया है जिससे सारी दुकानें बंद हैं। भूख प्यास से व्याकुल पुर्णिया निवासी धर्मेन्द्र सिंह, अरुण महतो, जितेंद्र पाल, अवधेश राय आदि ने कहा कि चार दिन पहले मुम्बई से हम लोग चले हैं रास्ते में बिस्किट आदि थोड़ा बहुत खाए हैं लेकिन पेट भर कहीं खाने को नहीं मिला है। मुम्बई में कंपनी बन्द हो गई और कंपनी के मैनेजर ने खोराकी देने तक से भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद घर से पैसा मंगवा कर किसी तरह किराए पर ट्रक लेकर जा रहे हैं। मांझी जयप्रभा सेतु से जब ट्रक को नहीं जाने दिया गया तो ट्रक चालक ने गोरखपुर के रास्ते पूर्णिया जाने का निर्णय लिया। इसी तरह अहमदाबाद गुजरात में कंपनी बन्द होने के बाद बिहार के मोतिहारी निवासी ताज आलम, सलीम, अरबाज ने बताया कि वह लेथ मशीन चलाने का काम करता था। कंपनी बन्द होने के बाद हम लोग दाने दाने को मोहताज हो गए। पास में किराया तक नहीं था जिससे हम लोग पैदल ही चल पड़े और 15 दिन में हम लोग बैरिया तक पहुंचे हैं। कुछ दिनों में मोतिहारी पहुंच जाएंगे।