चंद्रग्रहण के दौरान चित्तू पांडेय चौराहे के पास हनुमान मंदिर का बंद कपाट।
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नगर और ग्रामीण इलाकों में लोगों ने खग्रास चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा देखा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहे माघी पूर्णिमा और चंद्रग्रहण पर गंगातट पर आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। ठंड के बाद भी गंगा के प्रमुख घाटों पर स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही। रात नौ बजे चंद्रगहण जैसे ही समाप्त हुआ घाटों पर स्नान शुरू हो गया। वहीं मुस्लिम इलाकों में भी मस्जिदों और घरों में इबादत कर चांद पर आई मुसीबत से छुटकारे की दुआ की गई। इस दौरान लोगों में ग्रहण को लेकर उत्सुकता बनी रही। उन्होंने घरों की छतों आदि से ग्रहण देखा।
चंद्रग्रहण का सूतक काल सुबह 8.07 बजे से ही शुरु हो गया। शाम के वक्त चंद्रग्रहण लगने के साथ ही घरों की चल दिए। वहीं कुछ लोग जब-तप करने के साथ सिद्घ मंत्रोच्चार करते रहे।
चंद्रमा पर लगे ग्रहण को कुछ लोगों ने टीवी के माध्यम से देखा तो कुछ लोगों ने छतों पर से इसे देखा। वहीं परिवार के अभिभावक अपने बच्चों को ग्रहण न देखने की सलाह देते नजर आए। जबकि गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान एहतियात बरतते हुए बाहर नहीं निकलने दिया गया।
ज्योतिष पंडित आदित्य परासर की मानें तो ग्रह वेद के पहले जिन पदार्थो में कुश या तुलसी की पत्तिया डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ ग्रह काल के दौरान दूषित नहीं होते हैं। रात में करीब 8.42 बजे ग्रहण के समाप्त होने के बाद लोगों ने अपने-अपने घरों में स्नान का दान-पुण्य करने के साथ ही घरेलू महिलाओं ने खाना बनाना शुरु किया। वहीं, मुस्लिम बहुल इलाकों में भी मस्जिदों और घरों में लोगों ने चांद पर आई मुसीबत दूर करने के लिए इबादतें कीं। चित्तू पांडेय निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि चंद्रग्रहण का नजारा देखने के लिए लोग छतों पर पहुंचे और ग्रहण काल के दौरान ज्योतिषों द्वारा दिए गए निर्देशों का भी पालन किया गया। स्टेशन रोड के ओम प्रकाश चौरसिया का कहना था कि ग्रहण लगने के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। उन्होंने अपनी दूकान के बाहर निकलकर चंद्रमा को देखा। अगरसंडा निवासी विशाल ने कहा कि गांव में खुले आसमान के नीचे से सभी लोगों ने ग्रहण लगे चंद्रमा को देखा। इसके बाद घर के अंदर बैठकर जप तप भी किया। रामपुर निवासी आरपी सिंह ने बताया कि घर पर टीवी के माध्यम से ग्रहण का पल-पल का नजारा देखते रहे। वहीं ग्रहण पर बच्चे अपने बुजुर्गों से जानकारी लेते रहे।