बलिया। गंगा व घाघरा की कटान से मकान व उपजाऊ भूमि गंवाने वाले किसानों को शासन की तरफ से आर्थिक सहायता मिलने लगी है। कटान में घर खोने वाले 70 पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से अब तक 71.76 लाख की सहायता राशि प्रदान की गई है। अभी अन्य पीड़ितों को चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है। इस वर्ष गंगा व घाघरा के कटान से बैरिया व बांसडीह तहसील क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
नदियों की लहरों में पक्का व कच्चा मकान कटने पर पीड़ित को 1.20 लाख व झोपड़ी कटान की भेंट चढ़ने पर आठ हजार की सहायता शासन से दी जाती है।
वर्ष 2024-25 में बैरिया तहसील क्षेत्र में 26 व बांसडीह में 29 पक्के मकान नदी में समा गए हैं। इन सभी पीड़ितों को शासन की तरफ से 1.20 लाख की सहायता दे दी गई है। बैरिया तहसील में एक व बांसडीह तहसील में तीन कच्चे मकान कटान की भेंट चढ़ गए हैं। सरकार की तरफ से इन सभी कटान पीड़ितों को 1.20 लाख की धनराशि भेजी जा चुकी है। बैरिया तहसील में एक व बांसडीह तहसील में 11 झोपड़ी नदी में समा चुकी हैं। पीड़ितों को आठ हजार के हिसाब से दिया गया है।
अब तक 20 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी में समाई
गंगा व घाघरा के कटान में अपनी भूमि गंवाने वाले किसानों को शासन की तरफ से आर्थिक सहायता दी जानी लगी है। अभी तक 151 किसानों को सहायता प्रदान की गई हैं। दोनों नदियों के कटान में अब तक 20 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी में समा गई है। इसमें बैरिया तहसील क्षेत्र में एक हेक्टेयर व बांसडीह तहसील में सबसे अधिक 18 हेक्टेयर भूमि नदी में विलीन हुई है। अभी तक पीड़ित किसानों के खाते में दस लाख की राशि दी गई है। बैरिया तहसील के 33 व बांसडीह तहसील के 118 किसानों को आर्थिक सहायता दी गई है।
512 परिवारों को बर्तन व कपड़े के लिए मिला धन
अभी तक 52 कटान पीड़ितों को बर्तन, कपड़ा आदि खरीदने के लिए शासन से 2.60 लाख की धनराशि प्रदान की गई है।
बाढ़ पीड़ितों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी कुछ और पीड़ितों के मकान का कुछ हिस्सा कटा है। शासन से मिलने वाले सहायता आॅनलाइन पीड़ितों के खाते में भेजी जाती है। -देवेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम प्रशासन।