हल्दी क्षेत्र के जवही गांव में बाढ़ की पानी से डूबा बैगन और मिर्च का खेत।
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रामगढ़। खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर बह रही गंगा का जलस्तर प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है। गंगा का पानी अब करीब एक दर्जन गांव में प्रवेश कर चुका है। कुल 50000 की आबादी प्रभावित होती दिख रही है। किसानों के सैकड़ों बीघे खेत में खड़ी फसल जलमग्न हो गई है। पशुओं के चारे पर संकट मंडराने लगा है। अब भी प्रभावितों को इसके लिए समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। पीडि़तों में शासन-प्रशासन के प्रति खासी नाराजगी दिख रही है।
करीब एक सप्ताह से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। लगातार बढ़ाव होने के कारण दिन प्रतिदिन लोगों की मुश्किलें बढ़ती चली जा रही हैं। जिन लोगों का मकान कच्चा है, वह राष्ट्रीय राजमार्ग पर शरण ले रहे हैं या रिश्तेदारों के यहां ठौर बना रहे है। जिन पीडि़तों के मकान पक्के और दो मंजिला हैं, वह अभी भी गांव में ठहरे हुए हैं। बदीलपुर, पोखरा जग छपरा, सोनार टोला, बनिया टोला, सुघर छपरा, दुबे छपरा अनुसूचित बस्ती, दुबे छपरा गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा से लेकर टेंगरही रिंग बंधे तक पानी फैल चुका है। प्रशासन की तरफ से एनएच-31 पर वैकल्पिक रोशनी के तौर पर जनरेटर की व्यवस्था कर दी गई है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार की शाम चार बजे 59.450 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरा बिंदु 57.615 मीटर है। गंगा उच्चतम बाढ़ बिंदु 60.390 से 94 सेमी नीचे बह रही है। प्रति घंटा एक सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है। अगले तीन दिन का समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि धौरपुर बैराज से छोड़ा गया 25 लाख क्यूसेक पानी 31 अगस्त तक जनपद में पहुंचने की बात कही गई है।