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पशु आश्रय स्थल: गला बचाने के लिए होता है तरह-तरह का खेल

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बलिया। पशु आश्रय स्थल अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए पूरी तरह चारागाह बन कर रह गया है। पशुओं के मरने व चोरी होने को लेकर गला बचाने के लिए अधिकारी व कर्मचारी तरह-तरह के खेल करते हैं। इसके लिए या तो टैग का खेल होता है या फिर पशुपालन विभाग की कृपा बरसती है। अब तक कई पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत का सामना आ चुका है और पशु चोरी का मामला सामने आने लगा है। सोहांव स्थित पशु आश्रय स्थल से पशुओं की चोरी में भी ऐसा ही किया गया और मामले पर परदा डालने के लिए हथकंडे अपनाए गए।
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करीब 22 माह पहले मुख्यमंत्री ने स्थाई व अस्थाई गो आश्रय स्थल बनाकर छुट्टे गोवंश को पकड़ने का निर्देश जारी किया और साथ ही पकड़े गए पशुओं के चारा आदि के लिए धनराशि भी शासन की ओर से जारी की गई। लेकिन यह योजना पशुपालन व संबंधित ब्लॉक व नगर निकाय के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए चारागाह बना हुआ है। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कुछ दिनों तक शहरी व ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर छुट्टे पशुओं को पकड़ने का काम किया गया और उन्हें अस्थाई पशु आश्रय स्थल पर रखा गया। लेकिन वर्तमान में स्थिति पूर्व की तरह हो गई है। आलम यह है कि एक ओर पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत लगातार जारी है तो वहीं दूसरी ओर चारे के नाम पर धन के बंदरबांट का खेल भी चल रहा है। बताया जाता है कि पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत होने के बाद उसके कानों में लगे टैग को काटने के बाद पशुओं को अन्यत्र फेंक दिया जाता है और इसके बाद आनन-फानन में सड़कों से छुट्टे पशुओं को पशु आश्रय स्थल में लाकर
उसके कानों में पहना दिया जाता है। इसके अलावा हो हल्ला मचने की स्थिति में पशुपालन विभाग के चिकित्सक पोस्टमार्टम में बीमारी या अन्य कारण अंकित कर दोनों विभागों की कारस्तानी पर परदा डाल देते हैं।
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अब तक कई पशुओं की हो चुकी है मौत
बलिया। समय-समय पर गोआश्रय स्थलों में पशुओं के मरने की बात सामने आती रही लेकिन अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए हमेशा लीपापोती करते रहे। पूर्व में दयाछपरा, मनियर के गौराबगही, सिकंदरपुर और सोहांव पशु आश्रय स्थल में पशुओं के मौत का मामला सामने आता रहा लेकिन अफसर इस पर परदा डालते रहे। नगरा के रघुनाथपुर में तो हर माह पशु दम तोड़ते रहे और अधिकारी जांच के नाम पर कोरम करते रहे।
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पशु आश्रय स्थल में छुट्टे पशुओं को रखा जाता है। ऐसे मवेशी काफी कमजोर होते हैं और खासकर पॉलिथीन तक खाए रहते हैं। अधिकांश पशुओं के पोस्टमार्टम में यही सामने आया है।
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- डा. अशोक मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी, बलिया
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