फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गो आश्रय के मवेशी घूम रहे बाहर, चारा के नाम पर हो रहा खेल!-

विज्ञापन
रामलीला मैदान में बैठे छुट्टे पशु। - फोटो : BALLIA
विज्ञापन
बलिया। जिले में छुट्टा पशुओं को रखने के लिए खोले गए गो आश्रय केंद्र की स्थिति दयनीय है। पशुओं के चारे के नाम पर अबतक 22.84 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन स्थिति नहीं सुधरी। कान में टैग लगे पशुओं को छोड़ दिया गया है जो घूम कर न सिर्फ नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि हादसे का कारण बने हुए हैं। अक्सर छुट्टा पशु आने-जाने वालों को मारकर घायल कर देते हैं।
विज्ञापन

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद गो-वंश के वध पर रोक लगा दी गई। इसके चलते छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ गई है। ये छुट्टा पशु किसानों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। करीब साढ़े सात माह पहले पहले मुख्यमंत्री ने स्थायी और अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाकर छुट्टे गोवंश को पकड़ने का निर्देश दिया था। पशुओं के चारा आदि के लिए धनराशि भी जारी की गई लेकिन यह भी धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सका। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कुछ दिनों तक शहरी व ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर आवारा व छुट्टे पशुओं को पकड़ने का काम किया गया और उन्हें अस्थायी पशु आश्रय स्थल पर रखा गया लेकिन वर्तमान में स्थिति पूर्व की तरह हो गई है। बताया जाता है कि पशु आश्रय स्थल पर गोवंश रखने व चारा खिलाने के नाम पर भी खूब खेल किया जा रहा है। एक ओर जहां पशु आश्रय स्थलों पर मवेशियों की मौत हो रही है वहीं दूसरी ओर शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक के पशु आश्रय स्थल से मवेशियों को विचरण के लिए छोड़ दिया जाता है। ऐसे पशुओं को कागजों में चारा खिलाने का काम किया जाता है। पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अबतक कुल 22.84 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। शहर में तो कानों में टैग लगे मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं। शहर के रामलीला मैदान में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। इन्हें गोआश्रय स्थल नहीं ले जाया जाता है।
कोट
गो-आश्रय स्थल पर पशुओं को रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय और ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। उनकी ओर से प्रस्तुत मवेशियों की संख्या के आधार पर चारे के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। कानों में टैग लगे मवेशियों को गोआश्रय स्थल में रखना चाहिए।-डॉ. अशोक मिश्र, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें