जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने बुधवार को कलेक्ट्रेट पर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। उप्र राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ जिला इकाई के बैनर तले धरना-प्रदर्शन करते हुए कार्यकर्ताओं ने विभाग में भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का आरोप लगाया। मांगों को न पूरा किए जाने को लेकर शासन और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अंत में 12 सूत्रीय मांगों का पत्रक डीएम को सौंपा।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के संरक्षक बलवंत कुमार सिंह ने कहा कि बाल विकास परियोजना में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार फै ल गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का शोषण और उत्पीड़न किया जाता है। निजात के लिए कई बार मांगपत्र जिला प्रशासन को सौंपा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं में रोष व्याप्त है। चेताया कि अगर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मांगपत्र को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया गया तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
संघ के सचिव वंश बहादुर यादव ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाआें से स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के टीकाकरण, बीएलओ आदि जैसे कार्यक्रमाें में कार्य कराया जाता है। लेकिन मानदेय के नाम पर प्रतिदिन 100 रुपये भी नहीं पड़ रहा है। जबकि एक मनरेगा मजदूर की मजदूरी भी लगभग 180 रुपये है। रात-दिन कार्य करने वाली इन कार्यकर्ताआें और सहायिकाओं की मानदेय बदतर है। मांग किया कि कार्यकर्ताआें और सहायिकाओं का मानदेय 15 हजार रुपये किया जाए। चेताया कि अगर मांगाें को गंभीरता पूर्वक नहीं लिया गया तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस मौके पर जिलाध्यक्ष उषा सिंह, अविनाश उपाध्याय, अजय सिंह, अजय चौबे, दिग्विजय सिंह, विनोद सिंह समेत सैकड़ाें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं मौजूद रहीं। संचालन मोहन सिंह ने किया।