आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 15 अगस्त तक जिले में अमृत सरोवर बनकर तैयार होने थे। लेकिन अभी तक सभी सरोवरों का काम पूरा नहीं हो सका है। अब तक कुल 188 अमृत सरोवर बने हैं जबकि जिले में कुल 1880 अमृत सरोवर बनाने हैं।
जल संरक्षण की दिशा में सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके लिए तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया है। शुरुआत में सरकार ने 75 अमृत सरोवर विकसित करने को कहा था लेकिन बाद में प्रत्येक गांव में दो अमृत सरोवर विकसित करने का निर्देश दिया। इससे जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी बढ़ेगा। हालांकि अभी भी विभिन्न ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवरों के निर्माण का कार्य जारी है।
योजना के तहत एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले तालाबों का ही चयन किया गया है। अमृत सरोवर निर्माण पर ग्राम निधि व मनरेगा से खर्च किया जाना है। प्रत्येक अमृत सरोवर पर करीब 50 लाख का खर्च निर्धारित है। इसके अलावा जो सरोवर पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित किए जाएंगे उनपर 75 लाख तक का खर्च किया जाना है। अमृत सरोवर के पास सामुदायिक भवन, शौचालय और साफ पानी की व्यवस्था करनी है। इसके अलावा मोटरबोट की भी सुविधा दी जाएगी। विभागीय अधिकारी की मानें तो स्वतंत्रता दिवस तक 188 अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा कर लिया गया। बताया कि मुख्य रुप से अमृत सरोवरों पर पौधरोपण व झंडारोहण के लिए चबूतरा का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। अब इसके सुंदरीकरण को लेकर कार्य चलता रहेगा।
अमृत सरोवरों का निर्माण अभी जारी है। अब तक 188 अमृत सरोवर का निर्माण हो चुका है और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है। सुंदरीकरण का कार्य भी होगा।
- दिग्विजय नाथ तिवारी, प्रभारी उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार मनरेगा, बलिया।