गंगा के जलस्तर में चौथी बार बढ़ने लगा है। जिससे गंगा के तटीय इलाके में बसे लोग सहमे हैं। बाढ़ को देखते हुए फिर से लोग अपने सामानों को समेट कर एनएच 31 की ओर अपना रुख करना शुरू कर दिया है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर बुधवार की शाम 4 बजे 58.250 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रति घंटा एक सेमी का बढ़ाव जारी है।
गंगा का जलस्तर दो दिन पहले मीडियम फ्लड लेवल के करीब पहुंचकर स्थिर हो गया था। उसके बाद से गंगा के जलस्तर कम हो गया था। जिससे लोगों की घर गृहस्थी पटरी पर आनी शुरू हो गई थी। लेकिन बुधवार की सुबह 8 बजे उत्तराखंड से चला पहाड़ों व डेम का पानी पहुंचा तो गंगा के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी शुरू हो गई। गंगा के जलस्तर में वृद्धि की खबर जैसे ही गंगा के मुहाने पर बसे लोगों तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। सोनार टोला, दुबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, सुघर छपरा के लोग अपने सामानों को सहेजने में जुट गए हैं। ताकि समय रहते अपने सामानों को सुरक्षित ठौर पर पहुंचा सके। पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ विभाग द्वारा बाढ़ व कटान के नाम पर अब तक जो भी कार्य कराए गए हैं।वह गंगा की लहरों को रोकने में सक्षम नहीं दिख रहे है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम सभा गोपालपुर कन्हई ब्रह्म बाबा के स्थान के सामने रिवेटमेंट कार्य के बगल में हो रहे कटान को देखने से पता चल जाएगा।
बाढ़ विभाग ठोकर ऊंचा करने में जुटा
गंगा के जलस्तर में वृद्धि को देखते बाढ़ विभाग स्पर संख्या 27200 पर मिट्टी भरकर ठोकर को ऊंचा करने का काम शुरू कर दिया ताकि गंगा का जलस्तर बढ़ता भी है तो किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। वहीं गंगा के किनारे बसे लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर विभाग ने जब यह ठोकर का निर्माण पूर्ण कर दिया था तो फिर से इस पर मिट्टी किस मकसद से गिराया जा रहा है।
पानी बढ़ने पर कई गांव घिर सकते हैं
दया छपरा। एक बार फिर गंगा नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार बुधवार सुबह 10 बजे से एक सेंटीमीटर प्रति घंटा बाद पानी बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त करते कहा कि निचले इलाकों मे पानी भर गया है। अब अगर पानी बढ़ता है तो बाढ़ से गांव के गलियों के साथ ही सारे रास्ते बंद हो जाएंगे। इस बार अगर पानी का रफ्तार यही रहा तो जल्द ही दुबे छपरा, उदई छपरा, गोपालपुर, प्रसाद छपरा, आलम राय के टोला, बुधन चक, जागदेवा, पांडेय पुर आदि गांव पानी से घिर जाएंगे।