अधिवक्ताओं के लिए किए वादों को पूरा न करने से उनमें प्रदेश सरकार के प्रति गहरी नाराजगी है। इसे लेकर मंगलवार को क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार एसोसिएशन और कलेक्ट्रेट बार ऐसोसिएशन ने संयुक्त रूप से कलेक्ट्रेट परिसर में तथा दी
सिविल बार एसोसिएशन ने दीवानी न्यायालय के मुख्य गेट पर सीएम का पुतला फूंका तथा जमकर नारेबाजी की। इसके बाद एडीएम केपी सिंह को ज्ञापन सौंपा। निर्णय लिया कि इसके विरोध में चार मार्च को न्यायिक कार्यों से विरत रहते हुए धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
ज्ञापन में उल्लेख किया है कि समाजवादी पार्टी द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में अधिवक्ताओं के हित में कल्याण निधि की धनराशि 50 हजार से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने, अधिवक्ता पेंशन तथा जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड लागू किया जाए। वकीलों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अब तक अधिवक्ता हित के कल्याण के लिए कोई ध्यान नहीं दिया है।
इससे प्रदेश के अधिवक्तागणाें में आक्रोश है। बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के निर्देश में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कलेक्ट्रेट बार, क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार और दी सिविल बार के समस्त अधिवक्तागण चार मार्च को न्यायिक कार्य से विरत रहकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। अधिवक्ताओं ने मांग किया कि प्रदेश सरकार अधिवक्ता कल्याण निधि को 50 हजार से बढ़ाकर पांच लाख करे। इसके साथ अधिवक्ता पेंशन और जूनियर अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड योजना लागू करे।
अधिवक्ताओं के हित में अन्य योजनाओं को भी लागू किया जाए। निर्णय लिया गया कि अगर अधिवक्ता हित में मांगे नहीं मानी गईं तो 23 मार्च को विधानसभा का घेराव करेंगे। बावजूद सरकार मांग नहीं मानी तो अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए बाध्य होगें।
इस मौके पर कलेक्ट्रेट बार अध्यक्ष मदन लाल वर्मा, महामंत्री रविंद्र नाथ तिवारी, क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार अध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्रा, महासचिव चंद्रपाल सिंह, जूनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भुवनेंद्र कुमार सिंह, दि सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार ओझा, महासचिव अजय कुमार पांडेय, कृपाशंकर पांडेय, बृजेश कुमार श्रीवास्तव, प्रभाशंकर शुक्ल, नवाब वाजिद अली समेत सैकड़ों अधिवक्तागण मौजूद रहे।