बाढ़ पीड़ितों को घर-घर भोजन पहुंचाते पूर्व प्रधान एजाज
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रामगढ़। दुबे छपरा रिंग बंधा टूटने के बाद सैकड़ों बाढ़ पीड़ित एनएच 31 पर शरण लिए हुए हैं। लगभग दो सप्ताह तक इनके भोजन की व्यवस्था तो शासन प्रशासन स्तर से किया गया। लेकिन दो दिन से शासन प्रशासन ने दुबे छपरा से लेकर दया छपरा तक बाढ़ से बेघर हुए पीड़ितों के बीच भोजन की व्यवस्था नहीं उपलब्ध कराई है। जिसके चलते बाढ़ से बेघर लोग के मासूम भोजन के लिए बिलबिला आते नजर आए। उधर जनप्रतिनिधि द्वारा चलाया जा रहा लंगर भी बंद हो गया है। बताते चलें कि 17 सितंबर को दुबे छपरा रिंग बंधा टूटने के बाद दुबे छपरा, गोपालपुर, उदयई छपरा गांव में बाढ़ का पानी घुस गया था। जहां के लोग चंद मिनटों में एनएच 31 के ऊपर आ गए थे, जहां पहले तो शासन स्तर से भोजन के साथ ही मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराने का जिलाधिकारी ने प्रयास किया।
लेकिन दो दिनों से शासन स्तर से मिलने वाला भोजन का पैकेट और लंगर भी बंद हो गया है। यह कहकर कि बाढ़ पीड़ितों में राशन वितरण किया जा चुका है। पानी भी धीरे-धीरे घरों से निकल रहा है। सवाल यह उठता है कि जो सरकारी राशन मिला है वह बनेगा कहां? क्योंकि बाढ़ पीड़ितों के घर में पानी भरा हुआ है भोजन बनाने का जलावन की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाढ़ पीड़ित हरदम इस उम्मीद से टकटकी लगाए रहते हैं कि कोई रहनुमा आ जाए कि आज की सुबह मासूमों को दो जून की रोटी नसीब हो सके। इस बाबत एसडीएम बैरिया दुष्यंत कुमार ने बताया कि दुबे छपरा व उदय चपरा गोपालपुर के बाढ़ पीड़ितों में राशन का वितरण किया जा चुका है। गांव से पानी निकल रहा है। इसलिए पके पकाए भोजन की व्यवस्था अब बंद हो गई है।