करीब 19 साल पहले विधानसभा चुनाव में फर्जी वोट डालने को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हुई थी। इसमें मतदान के दूसरे दिन सुबह एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष पर जानलेवा हमला किया था।
इसमें एक की मौत हो गई थी। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक आरोपी को दोषी पाकर उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। शेष छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अश्विनी कुमार सिंह की अदालत में हुई।
अभियोजन के अनुसार हल्दी थाना क्षेत्र के नवका गांव निवासी वादी मुकदमा पंचानंद यादव ने आठ अक्टूबर 1996 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि विधानसभा चुनाव में फर्जी मत डालने को लेकर गांव के कुछ लोगों से कहासुनी हुई थी।
इसमें आठ अक्टूबर, 1996 को सुबह साढ़े पांच बजे मेरे ही गांव के अक्षयवर पांडेय, देवकुमार, निर्मल कुमार, प्रेम कुमार, अभिमन्यु, संतोष, मार्कंडेय, परमानंद, श्याम बिहारी आदि लोग गोलबंद होकर अलगू यादव पर जान से मारने की नीयत से हमला बोल दिया और पीटने लगे।इससे उनकी मौत हो गई।
आरोपी परमानंद और श्याम बिहारी की मृत्यु हो चुकी है। शेष आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मार्कंडेय ओझा को दोषी पाया और आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया।